डिजिटल दुनिया में भी किताबों की चाहत बरकरार, विश्व पुस्तक मेले में बड़ी तादाद में दिखे युवा 

डिजिटल दुनिया में भी लोगों के भीतर किताबों की चाहत बरकरार है। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्कत मेले में लोगों का हुजूम इस बात का सबूत है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया
user

अर्जुन सिंह

डिजिटल दुनिया में भी लोगों के भीतर किताबों की चाहत बरकरार है। दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित विश्व पुस्कत मेले में लोगों का हुजूम इस बात का सबूत है। 6 से 14 जनवरी तक चलने वाले इस पुस्तक मेले में हर वर्ग के लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। अच्छी बात यह है कि पुस्तक मेले में युवा भी अच्छी खासी तादाद में दिखे।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया
दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में किताब खरीदते लोग

पुस्तक मेले में करीब 400 प्रकाशकों ने दुकानें लगाईं। मेले में ग्राहकों के पास किताबों को लेकर कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें से वे अपनी पसंद के अनुसार किताबें खरीद सकते हैं। पेंगुइन पब्लिकेशन के जनरल मैनेजर ऑफ सेल्स समीर महाले कहते हैं, “पेंगुइन पब्लिकेशन भारत में लगभग 40 हजार अलग-अलग किताबें बेचती है। सामान्य तौर पर हमारी सारी किताबें सभी दुकानों पर नहीं मिलती हैं, लेकिन पुस्तक मेला में लगभग सभी किताबें उपलब्ध हैं।” समीर महाले के मुताबिक, डैन ब्राउन की किताब ‘ओरिजिन’ और जॉन ग्रीन की किताब ‘टर्टल्स आल द वे डाउन’ युवाओं के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। समीर महाले ने बताया, “पुस्तक मेले में बच्चों की किताबों की बहुत मांग होती है, यही वजह है कि हमने पिछले साल से 2 अधिक स्टॉल सिर्फ बच्चों की किताबों के लगाए हैं।” ई-बुक के सवाल पर उन्होंने बताया कि भारत में ई-बुक को आए सिर्फ 4-5 साल हुए हैं, लेकिन उसकी वजह से किताबों की बिक्री में कोई खास कमी नहीं आई है। समीर महाले ने कहा कि पेंगुइन पब्लिकेशन ई-बुक्स निकालती है, लेकिन उसकी पहुंच अभी बहुत छोटे समूह तक ही है।

पुस्तक मेले में धार्मिक और दार्शनिक किताबें लेने पहुंचे 60 वर्षीय अशोक भुजानि कहते हैं, “ई-बुक का इस्तेमाल तो मैं भी करता हूं, लेकिन पढ़ने का यह तरीका आंखों के लिए हानिकारक है और यह माध्यम वास्तविक किताब पढ़ने का सुख नहीं दे पता है।”

पुस्तक मेले में उपन्यास खरीदने पहुंचीं दो बहनें अलंकृता और शुभांगी ने बताया कि किताबों की एक लत होती है, जिसकी जगह कोई भी टेक्नोलॉजी कभी नहीं ले सकती। आजकल कॉलेज में भी हमें सारे नोट्स ई-बुक्स के ही रूप में मिलते हैं जिन्हें पढ़ना पड़ता है, लेकिन उनमें किताबों वाली बात नहीं होती है और न ही पढ़ने में आनंद आता है।

फोटो: नवजीवन
फोटो: नवजीवन
टीशर्ट्स पर लिखे किताबों के नाम

पुस्तक मेले में विलियम शेक्सपियर के साहित्य पर आधारित टी-शर्ट्स लाने वाले नोशनप्रेस डॉट कॉम के सीईओ नवीन वलसकुमार बताते हैं कि उनकी पब्लिशिंग कंपनी अभी महज 5 साल पुरानी है। वह नए लेखकों को मौका दे रहे हैं। ‘ओस की बूंदें’ उनकी सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तक रही है।

हैचेट बुक पब्लिकेशन की प्रोडक्ट एग्जीक्यूटिव सुहानी अरोड़ा ने बताया कि पुस्तक मेले में सभी उम्र के लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, जिनमें युवाओं की संख्या ज्यादा रही है। युवाओं में जे के रोलिंग, स्टीवन किंग और नील गैमन जैसे लेखकों की मांग है। उन्होंने बताया कि जे के रोलिंग की किताब ‘हैरी पॉटर एंड र्क्श्ड चाइल्ड’, ऋतू सिंह की किताब ‘स्टैक रविंग ऐड’ और मिचेल वोल्फ की किताब ‘फायर एंड फ्यूरी’ लोगों में आकर्षण का केंद्र रही है।

फोटो: नवजीवन
फोटो: नवजीवन
पुस्तक मेले में ‘बुकचोर’ स्टॉल

विश्व पुस्तक मेले में 'बुकचोर' स्टॉल ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। स्टॉल पर चोरी की किताबें नहीं मिलती हैं, बल्कि पुरानी किताबों को कम दामों पर बेचा जाता है।

'बुकचोर' स्टॉल के प्रबंधक भावेश शर्मा ने इस अजीब से नाम के बारे में बताया, “हम कुछ ऐसा नाम चाहते थे, जिससे लेकर लोगों में उत्सुकता बने, लोग सर्च करें कि आखिर यह है क्या। इसलिए यह नाम रखा गया।” उन्होंने कहा, “हमारा लक्षित पाठक वर्ग युवा हैं। फिक्शन और नॉन फिक्शन श्रेणियों में महंगी से महंगी पुरानी किताबों को हम काफी कम दाम में बेचते हैं।” 'बुकचोर' ने अक्टूबर, 2015 में संचालन शुरू किया था।

भावेश शर्मा कहते हैं, “अक्टूबर 2015 में काम शुरू करने के बाद से अब तक हमारे पाठकों की संख्या पांच लाख हो गई है।” उन्होंने बताया, “हमारे पाठक अरुणाचल प्रदेश से लेकर केरल तक हैं। हमारी वेबसाइट ‘बुकचोर’ डॉट कॉम से भी किताबें बुक की जा सकती हैं। इसके साथ ही हमारा एक एप भी है, जिसकी मदद से आप आसानी से पुरानी किताबें खरीद कर सकते हैं।”

'बुकचोर' अंग्रेजी की पुरानी किताबें ही बेचता है। 'फिफ्टी शेड्स ट्रिलॉजी' का मूल्य 1499 रुपये है, लेकिन ‘बुकचोर’ से इसे सिर्फ 258 रुपये में ही खरीदा जा सकता है।

Google न्यूज़नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia


Published: 13 Jan 2018, 3:13 PM