'BJP शासित राज्यों में ‘बुलडोजर न्याय’ संविधान का अपमान', मध्य प्रदेश मामले का जिक्र कर जयराम ने सरकार को घेरा

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जिन लोगों के घर ध्वस्त किए गए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश
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कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के खरगोन में चार वर्ष पहले रामनवमी पर हुई हिंसा मामले में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में ‘‘बुलडोजर न्याय’’ के नाम पर जो किया जा रहा है, वह संविधान का घोर अपमान है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जिन लोगों के घर ध्वस्त किए गए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अप्रैल, 2022 में खरगोन में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा भड़कने के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए शहर के पांच मुस्लिम बहुल इलाकों में 16 मकानों और 29 दुकानों को ध्वस्त कर दिया था।

उन्होंने कहा कि उस समय मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, ‘‘जिस घर से पत्थर आए हैं, उस घर को ही पत्थरों का ढेर बनाएंगे।’’


रमेश ने दावा किया कि जुलाई, 2026 में मध्य प्रदेश के एक सत्र न्यायालय ने 2022 की रामनवमी हिंसा के मामले में आरोपी सभी 11 मुस्लिम पुरुषों को बरी कर दिया।

उन्होंने कहा कि अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों के खिलाफ न कोई विश्वसनीय साक्ष्य था, न कोई गवाह था और न ही कोई विधिसम्मत जांच की गई थी।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अदालत द्वारा आरोपियों को निर्दोष करार दिए जाने के बावजूद बीजेपी का ‘‘बुलडोजर न्याय’’ वर्षों पहले ही दिया जा चुका था।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्यों में बुलडोजर कार्रवाइयों का निशाना लगातार मुस्लिम समुदाय को बनाया गया तथा उनके धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और घरों तक को ध्वस्त किया गया।


रमेश ने आरोप लगाया कि यह कानून के शासन और संविधान, दोनों का घोर अपमान है।

उन्होंने मांग की, ‘‘जिन लोगों के घर ध्वस्त किए गए, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाए।’’

पीटीआई के इनपुट के साथ