नागरिकता बिल पर बांग्लादेश की कड़ी प्रतिक्रिया, कहा- इससे भारत की ऐतिहासिक धर्मनिरपेक्ष छवि होगी कमजोर

बांग्लादेश के विदेश मंत्री एकेअब्दुल मोमेन ने कहा कि उन्हें (भारत) अपने देश के भीतर कई समस्याएं हैं। उन्हें आपस में लड़ने दें। हम इससे परेशान नहीं हैं। एक मित्र देश के रूप में हम आशा करते हैं कि भारत कुछ ऐसा नहीं करेगा जिससे हमारे संबंध प्रभावित हों।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

नागरिकता संशोधन बिल पर बांग्लादेश ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन ने कहा कि नागरिकता विधेयक से भारत की ऐतिहासिक धर्मनिरपेक्ष छवि कमजोर होगी। उन्होंने अपने देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताए जाने के आरोपों का भी खंडन किया। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा कि बहुत कम देश हैं जहां बांग्लादेश की तरह सांप्रदायिक सद्भाव अच्छा है। अगर वह (गृह मंत्री अमित शाह) कुछ महीनों के लिए बांग्लादेश में रहें तो उन्हें हमारे देश में सांप्रदायिक सद्भाव दिखाई देगा।

गौरतलब है कि सदन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि बांग्लादेश और पाकिस्तान समेत कई ऐसे पड़ोसी देश हैं, जहां हिंदुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि इस बात को ध्यान में रख कर इस बिल को लाया गया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने अमित शाह के इसी बयान का खंडन किया है।


बांग्लादेश के विदेश मंत्री एकेअब्दुल मोमेन ने कहा, “उन्हें (भारत) अपने देश के भीतर कई समस्याएं हैं। उन्हें आपस में लड़ने दें। हम इससे परेशान नहीं हैं। एक मित्र देश के रूप में हम आशा करते हैं कि भारत कुछ ऐसा नहीं करेगा जिससे हमारे संबंध प्रभावित हों।”

मोमेन ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व भी उनके दावे की पुष्टि करते हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश धार्मिक सौहार्द को कायम रखता है और यह सुनिश्चित करता है कि सभी धर्मों के लोगों को बराबर अधिकार मिले। बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने ढाका में अमेरिकी राजदूत अर्ल आर मिलर से बात की और उन्होंने भी नागरिकता विधेयक पर चिंता जाहिर की।


लोकसभा से पास होने के बाद बुधवार को राज्यसभा से भी नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया। बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े। वहीं, बिल के विरोध में 105 वोट पड़े। कुल 230 सांसदों ने अपने मतों का इस्तेमाल किया। यह विधेयक दोनों सदनों से पास हो गया है। विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बन जाएगा।

नागरिकता संशोधन बिल क्या है?

नागरिकता संशोधन बिल को संक्षेप में CAB भी कहा जाता है और ये बिल शुरू से ही विवाद में रहा है। विधेयक में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के 6 अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से संबंध रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है। मौजूदा कानून के असार, किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल भारत में रहना जरूरी है। इस विधेयक में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए ये समयावधि 11 से घटाकर 6 साल कर दी गई है।

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Published: 12 Dec 2019, 9:01 AM
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