बेअदबी मामला: डेरा सच्चा सौदा से जुड़ रहे घटना के तार, पर क्यों राम रहीम से पूछताछ की इजाजत नहीं दे रही खट्टर सरकार?

हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा, सिरसा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह की मुश्किलें बढ़ना तय हैं। पांच साल पुराने बहुचर्चित बरगाड़ी बेअदबी मामले में पंजाब की फरीदकोट पुलिस ने सात डेरा अनुयायियों को शनिवार को गिरफ्तार करके रिमांड पर लिया।

फोटो: सोशल मीडिया
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अमरीक

हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा, सिरसा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह की मुश्किलें बढ़ना तय हैं। पांच साल पुराने बहुचर्चित बरगाड़ी बेअदबी मामले में पंजाब की फरीदकोट पुलिस ने सात डेरा अनुयायियों को शनिवार को गिरफ्तार करके रिमांड पर लिया। पिछले हफ्ते डीआईजी जालंधर रेंज रणबीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी टीम को बेअदबी मामले की तीन घटनाओं की जांच सौंपी गई थी। इसी एसआईटी टीम ने अनुयायियों की गिरफ्तारी की है। इनकी संलिप्तता के पूरे सबूत पुलिस के पास हैं। पुलिस अपने सबूतों को और ज्यादा पुख्ता कर रही है।

गौरतलब है कि पांच साल पहले हुआ बरगाड़ी कांड आज भी पंजाब और सिख समुदाय के लिए बेहद संवेदनशील मसला है। तब सूबे में अकाली-बीजेपी गठबंधन की हुकूमत थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, गृह विभाग के मुखिया उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और पुलिस महानिदेशक सुमेध सिंह सैनी की पूरे प्रकरण में भूमिका शक के दायरे में थी और विपक्ष अब तक उन्हें घेरता है। माना जाता है कि बरगाड़ी कांड अकाली-बीजेपी गठबंधन की हार की एक बड़ी वजह बना। बहुतेरे आम सिख बादलों से परे हो गए। अकालियों के परंपरागत वोट भी छिटक गए। बेशक अकाली-बीजेपी गठबंधन सरकार ने इस मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी थी लेकिन लंबी पड़ताल के बावजूद सीबीआई को इन घटनाओं का कोई सुराग नहीं 'मिल' पाया। सन् 2018 के दौरान (पहले भी जांच उसके हवाले थी और अब भी) डीआईजी रणवीर सिंह खटड़ा की अगुवाई वाली एसआईटी ने मोगा और बठिंडा से संबंधित बेअदबी मामलों की पड़ताल के दौरान दावा किया था कि बरगाड़ी कांड को डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों ने अंजाम दिया है।

एसआईटी ने 10 अनुयायियों की पहचान करते हुए अपनी जांच रिपोर्ट सीबीआई को सौंप दी थी। लेकिन इसके बावजूद सीबीआई ने अपनी पड़ताल के दौरान इन सभी को क्लीन चिट देकर मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। (सर्वविदित है कि सीबीआई केंद्र के अधीन है)। इसके बाद उठे राजनीतिक बवाल के बीच पंजाब सरकार ने विधानसभा में प्रस्ताव पारित करते हुए बरगाड़ी बेअदबी कांड मामले की जांच सीबीआई से वापस लेने की घोषणा कर दी थी और डेढ़ साल बाद अब यह केस राज्य सरकार के पास वापस आया है तथा जांच पंजाब पुलिस की एसआईटी ने शुरू कर दी है। पूर्व में की पड़ताल में शिनाख्त किए गए 10 अनुयायियों में मुख्य आरोपी बनाए गए डेरे की कोर कमेटी के सदस्य महेंद्र पाल बिट्टू की पिछले साल नाभा जेल में हत्या हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी का साफ मानना है कि बेअदबी कांड के तार डेरा सच्चा सौदा मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। पंजाब पुलिस ने दो बार हरियाणा सरकार को लिखा कि वह उसकी रोहतक स्थित सुनारिया जेल में सख्त उम्र कैद की सजा काट रहे बाबा से पूछताछ करना चाहती है लेकिन अनुमति नहीं मिली। अब डेरे के गिरफ्तार अनुयायियों से गहन पूछताछ के बाद एसआईटी संभवतः नए सिरे से कोशिश करेगी और सूत्रों के मुताबिक जरूरत पड़ने पर इस बार अदालत में अर्जी दी जाएगी।

आरोप है कि अनुयायियों ने इसलिए श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी की कि पंजाब में गुरमीत राम रहीम सिंह की फिल्म का विरोध हो रहा था। बताया जाता है कि डेरा सच्चा सौदा अनुयायी बाबा के 'अपमान' का 'बदला' लेना चाहते थे। इसलिए उन्होंने श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान किया। गुरमीत राम रहीम सिंह की नज़दीकियां शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के बड़े नेताओं से जगजाहिर रही हैं। कोर्ट की सख्ती के चलते वह कई संगीन मामलों में सजायाफ्ता हैं। अब बरगाड़ी के सच की आंच उन तक पहुंच रही है। सियासी माहिरों का मानना है कि पंजाब पुलिस के हाथ अगर बाबा तक पहुंचते हैं तो सूबे का एक बड़ा राजनीतिक परिवार (जो शिरोमणि अकाली दल से वाबस्ता है) गंभीर परेशानियों के दरपेश होगा। जैसे-जैसे बरगाड़ी बेअदबी कांड की जांच रफ्तार पकड़ रही है वैसे-वैसे इस परिवार की बेचैनी और बौखलाहट में इजाफा हो रहा है!

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