कांग्रेस ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से मांगा जवाब, लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का दिया नोटिस

लोकसभा सचिव को लिखे पत्र में सांसद ने कहा, "मैं 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े एक जरूरी सार्वजनिक महत्व के मामले पर चर्चा करने के लिए 'स्थगन प्रस्ताव' पेश करने की अनुमति चाहता हूं।"

मणिकम टैगोर बी. ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री से मांगा जवाब, लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का दिया नोटिस
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कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर बी ने एक बार फिर लोकसभा सचिव को पत्र भेज कर लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। सांसद ने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर केंद्रीय गृह मंत्री के बयान की मांग की है।

लोकसभा सचिव को लिखे पत्र में सांसद ने कहा, "मैं 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई से जुड़े एक जरूरी सार्वजनिक महत्व के मामले पर चर्चा करने के लिए 'स्थगन प्रस्ताव' पेश करने की अनुमति चाहता हूं। इस घटना से जुड़ी रिपोर्टों और आरोपों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए इस्तेमाल किए गए बल के तरीके और उसकी मात्रा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं। आरोप है कि छात्रों (जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं) के खिलाफ लाठीचार्ज, पैलेट गन, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जिससे लोग घायल हुए और व्यापक स्तर पर सार्वजनिक चिंता पैदा हुई। इन आरोपों की पूरी, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत है।"


सांसद ने आगे लिखा, "इस सदन को यह जानने का हक है कि पुलिस कार्रवाई की मंजूरी किसने दी और किसके निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। क्या बल का प्रयोग कानून, तय पुलिस प्रक्रियाओं और शांतिपूर्ण सभाओं से जुड़े संवैधानिक सुरक्षा-उपायों के अनुसार किया गया? क्या पेलेट गन, आंसू गैस, वॉटर कैनन या भीड़ को नियंत्रित करने के किसी अन्य उपाय का इस्तेमाल किया गया, और किन हालात में? विरोध-प्रदर्शन के दौरान घायल हुए, हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार किए गए छात्रों (जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं) की संख्या क्या है? क्या पुलिस के गलत व्यवहार या ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग के बारे में कोई शिकायत मिली है और उस पर क्या कार्रवाई की गई है? क्या सरकार इस घटना की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समय-सीमा के भीतर न्यायिक जांच का आदेश देगी ताकि तथ्यों का पता लगाया जा सके और जहां ज़रूरी हो, जवाबदेही तय की जा सके? विरोध-प्रदर्शन के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की संख्या, लगाए गए आरोप और ऐसी आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के कारण क्या हैं?"

मणिकम टैगोर बी ने कहा, "क्या सरकार दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के सिलसिले में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस लेगी और यह भरोसा दिलाएगी कि शांतिपूर्ण छात्र विरोध और लोकतांत्रिक असहमति के मामले में पुलिस कार्रवाई, आपराधिक मुकदमा या किसी भी तरह का कानूनी दबाव नहीं डाला जाएगा? क्या सरकार जबरदस्ती के तरीकों के बजाय बातचीत के ज़रिए छात्रों की शिकायतों को दूर करने के लिए उनसे बातचीत करने का इरादा रखती है? क्या इस घटना को लेकर जनता में फैली व्यापक चिंता को देखते हुए, अगर जांच में यह साबित होता है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ज़रूरत से ज़्यादा या बिना वजह बल का इस्तेमाल किया गया था, तो प्रधानमंत्री संसद में खेद व्यक्त करेंगे और छात्रों से माफी मांगेंगे?


कांग्रेस सांसद ने कहा, "इस घटना से जुड़े आरोपों ने जनता के बीच व्यापक चिंता पैदा की है और भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के अधिकार, नागरिक स्वतंत्रता की सुरक्षा और कानून लागू करने वाली एजेंसियों में जनता के भरोसे जैसी संवैधानिक गारंटियों से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए हैं। सदन का यह कर्तव्य है कि वह इन मुद्दों की जांच करे और सरकार को जवाबदेह ठहराए। इसलिए, मेरा अनुरोध है कि सदन के सामान्य कामकाज को स्थगित किया जाए ताकि इस मामले पर तुरंत चर्चा हो सके और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद के समक्ष इस घटना और सरकार द्वारा प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में विस्तृत बयान देने को कहा जा सके।"

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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