डालमिया को लाल किला दिए जाने पर मचा बवाल, कांग्रेस के बाद शिवसेना ने जताया एतराज

मोदी सरकार की ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना के तहत पर्यटन मंत्रालय और डालमिया समूह के बीच हुए करार के तहत कंपनी को अगले पांच साल तक लाल किला के रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी दी गई है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देश की सम्प्रुभता का प्रतीक चिन्ह माना जाने वाला लाल किला, जिस लाल किले की तस्वीर को देश की मुद्रा पर छापा जाता है, जिस लाल किले के प्रांगण में आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान समेत कई अधिकारियों पर मुकदमा चलाया गया, जिस लाल किले पर स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर हर साल देश के प्रधानमंत्री तिरंगा फहरा कर आजादी का जश्‍न मनाते हैं, जो लाल किला दिल्ली ही नहीं पूरे देश की शान है, उस लाल किला को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने एक निजी कॉरपोरेट कंपनी के हाथों में सौप दिया है।

मोदी सरकार की 'एडॉप्ट ए हेरिटेज' योजना के तहत केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और डालमिया ग्रुप के बीच 25 करोड़ रुपये में हुए करार के तहत अगले पांच साल तक डालमिया कंपनी इस ऐतिहासिक विरासत स्थल का संचालन और रखरखाव करेगी। इसके लिए लगीं बोली में डालमिया समूह ने यह ठेका इंडिगो एयरलाइंस और जीएमआर ग्रुप को पछाड़कर हासिल किया। इसके लिए पिछले दिनों पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अल्फोंस, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के प्रतिनिधियों और डालमिया भारत के कार्यकारी निदेशक संदीप कुमार की मौजूदगी में एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए।

भारत के वैभव और शौर्य की निशानी लाल किला को डालमिया कंपनी को सौंपे जाने पर खासा विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस समेत कई दलों ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है। कांग्रेस ने इस फैसले को लेकर सरकार पर बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर पूछा कि “बीजेपी सरकार अब किस प्रतिष्ठित स्थल को प्राइवेट कंपनी के हवाले करेगी? संसद, सुप्रीम कोर्ट या फिर लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास)।”

बीजेपी की परंपरागत सहयोगी रही शिवसेना ने भी मोदी सरकार के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। शिव सेना नेता मनीषा कायंडे ने कहा कि ये बहुत शर्मनाक बात है कि हम अपने ही धरोहरों का रखरखाव नहीं कर सकते हैं। सरकार को इस पर फिर से विचार करना चाहिए।

वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, ''मोदी सरकार द्वारा इसे लाल किले का निजीकरण करना कहोगे, गिरवी रखना कहोगे या बेचना। अब प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस का भाषण भी निजी कंपनी के स्वामित्व या नियंत्रण वाले मंच से होगा। ठोको ताली। जयकारा भारत माता का!''

सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए संस्कृति और पर्यटन मंत्री डॉ महेश शर्मा ने कहा कि हम किलों के रखरखाव के लिए जन भागीदारी चाहते हैं। महेश शर्मा ने कहा, “हमने अपने धरोहरों को निजी कंपनियों को पट्टे पर नहीं दिया है। यह फैसला धरोहरों की बेहतरी के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा लिया गया है। निजी संगठनों को संग्रह या सुधार का अधिकार नहीं बल्कि सिर्फ सहायक सेवाओं का काम दिया गया है।” शर्मा ने आगे कहा कि इन धरोहरों के रखरखाव के लिए कोष की कोई कमी नहीं है, हमने वे कदम उठाए हैं, जो ये लोग 60 साल में नहीं उठा सकते। उन्हें शर्म आनी चाहिए।

करार के अनुसार, डालमिया समूह लाल किला को पर्यटकों के बीच अधिक लोकप्रिय बनाने के लिए काम करेगा। लाल किले के सौंदर्यीकरण से लेकर रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसकी होगी। समझौते के तहत डालमिया समूह 6 महीने के भीतर लाल किला में जरूरी सुविधाएं मुहैया कराएगा। इसमें एप बेस्ड गाइड, डिजिटल स्क्रिनिंग, फ्री वाईफाई, डिजिटल इंटरैक्टिव कियोस्क, पानी की सुविधा, टेक्टाइल मैप, टॉयलेट अपग्रेडेशन, रास्तों पर लाइटिंग, बैटरी चालितवाहन, चार्जिंग स्टेशन, सर्विलांस सिस्टम, कैफेटेरिया आदि शामिल है।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने 27 सितंबर 2017 को विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर 'एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत देश के अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को गोद लेने के लिए 195 आवेदन मिल चुके हैं। जिन्हें सरकार अन्य निजी कंपनियों को सौंप सकती है। यह योजना भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के तहत आने वाले प्रमुख स्मारकों में शुरू की गई है, जिसमें 95 स्मारकों को शामिल किया जा चुका है।

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