उत्तर प्रदेशः पति बेरोजगार था, बच्चे भूखे थे, तो बिजनौर में मां ने अपने बच्चों के साथ खुदकुशी कर ली...

यूपी के बिजनौर में आर्थिक तंगी की वजह से एक महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ खुदकुशी की

कमाल की बात ये है बिजनौर प्रशासन इस घटना का रुख पलटने की कोशिश कर रहा है और यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि यह आत्महत्या गरीबी से तंग आकर की गई है। दो लोगों की मौत के बाद भी बिजनौर प्रशासन ने परिवार की मदद करने से इंकार कर दिया है।

न्यू इंडिया की चकाचोंध और हवाई चप्पल से हवाई जहाज तक के नारों के बीच उत्तर प्रदेश में एक कलेजा छील देने वाली शर्मनाक घटना सामने आई है। घटना बिजनौर की है, जहां गरीबी से तंग आकर एक गरीब महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ खुदकुशी कर ली। एक बेटी तो मौके पर ही मर गई, जबकि दूसरी अभी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। यह लोमहर्षक घटना बिजनौर जिले के नहटौर थाना क्षेत्र के बैरमनगर में हुई है। पड़ोसियों के मुताबिक उनके बगल में रहने वाली 40 साल की कुसुम का पति सुखबीर भट्टे पर मजदूरी करता है। कुछ दिन पहले उसका काम छुट गया था और वह बहुत ज्यादा शराब पीने लगा था। काम छूटने और शराब की लत की वजह से परिवार की आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि बच्चे खाने को तरस गए। घर में कई दिनों से आटा तक नहीं था। बच्चों को भूख से तड़पता देख कुसुम बर्दाश्त नहीं कर पाई और वो टूट गई और ये कदम उठा लिया। मृतका कुसुम के चार बच्चे हैं। इनमें से एक बेटा ऋतिक है और तीन बेटियां हैं। जिस समय महिला ने अपनी दोनों छोटी बेटियों के साथ जहर खाकर जान दी उस समय दोनों बड़े बच्चे स्कूल गए हुए थे। पिछले काफी समय से बच्चों की स्कूल फीस भी जमा नहीं की गयी है।

कमाल की बात ये है बिजनौर प्रशासन इस घटना का रुख पलटने की कोशिश कर रहा है और यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि यह आत्महत्या गरीबी से तंग आकर की गई है। दो लोगों की मौत के बाद भी बिजनौर प्रशासन ने परिवार की मदद करने से इंकार कर दिया है। स्थानीय एसडीएम वीरंद्र मौर्य के मुताबिक महिला का घर पक्का है और उसका राशन कार्ड भी बना हुआ है, इसलिए उसके परिवार को मुआवजा नहीं दिया जा सकता। पूर्व विधायक शीशराम सिंह के मुताबिक यह बेहद शर्मनाक स्थिति है और सरकार इसपर अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती। उन्होंने कहा, “भट्टे पर काम करने वाले मजदूर साल भर में आठ महीने बेरोजगार रहते हैं। यह तर्क भी अजीब है कि मृतकों का घर पक्का है, इसलिए कोई मुआवजा नहीं दिया जा सकता। आर्थिक तंगी पक्के घर वालों को भी हो सकती है।”

हालांकि, गांव के प्रधान सुरेन्द्र सिंह ने भी परिवार की आर्थिक तंगी की बात की पुष्टि की है। उनका कहना है कि यह परिवार बेहद आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। अक्सर पडोसी इनके बीच की बातचीत को सुन लेते थे। चूंकि महिला काफी खुद्दार थी, इसलिए वो किसी से मदद मांगने बाहर नहीं आई। पिछले दिनों उसने एक गाय ली थी जिसका दूध बेचकर वो परिवार चला रही थी। उसका पति सुखबीर बुरी तरह तनावग्रस्त था और हमेशा नशे में रहता था। महिला की मौत के बाद घर में पहुंची पड़ोस की औरतों को उसके घर में आटा तक नहीं मिला। बड़ी बेटी ने बताया की घर में पिछले तीन दिन से खाना नहीं बना था।

पूर्व प्रधान राजेंद्र सिंह कुसुम की मौत के पीछे आर्थिक कारणों को जिम्मेदार बताते हैं। वो कहते हैं कि कुसुम का पति सुखबीर बीमार चल रहा था, जिससे वह शारीरिक श्रम करने में असमर्थ था। परिवार को कुसुम पालने की कोशिश कर रही थी, जिसमें वो टूट गई। कुसुम की बड़ी बेटी तनु के मुताबिक घर में पैसे की कमी थी। उसके और उसके भाई की स्कूल फीस भी नहीं जा पा रही थी। जब कुसुम ने अपनी छोटी बेटी निशि और खुशी के साथ जहर खाकर जान दी तो तनु अपने भाई के साथ स्कूल में थी और पिता सुखबीर कहीं काम की तलाश में घर से बाहर गया हुआ था। कुसुम की दूसरी बेटी निशि की हालात अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।

गरीबी से तंग आकर आत्महत्या का यह उत्तर प्रदेश में पहला मामला नहीं है। इससे पहले जुलाई में बरेली में इसी तरह की घटना हो चुकी है। जिले के आंवला तहसील के अतरछड़ी गांव में दो महीने पहले राजवती नाम की महिला ने अपनी बेटी रानी के साथ आर्थिक तंगी से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी। जुलाई में ही कुशीनगर में एक दंपत्ति ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर अपने बच्चों के साथ आत्महत्या कर ली थी। हालांकि इन घटनाओं को भी स्थानीय प्रशासन ने गरीबी की वजह से हुई मौत मानने से इंकार कर दिया था। सामाजिक संस्था ‘अस्तित्व’ की समन्वयक शादाब अंसारी कहती हैं, “गरीबी हटाओ के नारों के बीच गरीब हट रहे हैं, सरकारी अधिकारी बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। रोजगार न होने की वजह से लोग बड़ी संख्या में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जबकि सरकारी रोजगार वाली नरेगा जैसी योजनाओ में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है।”

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