कब है दशहरा? जानें तिथि, महत्व और उत्सव के बारे में

दशहरा या विजय दशमी का पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल दशहरा का पर्व 15 अक्टूबर को मानाया जाएगा। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन रावण और महिषासुर के वध के उपलक्ष में विजय दशमी का पर्व मनाते हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

दशहरा या विजय दशमी का पर्व अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल दशहरा का पर्व 15 अक्टूबर को मानाया जाएगा। शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन रावण और महिषासुर के वध के उपलक्ष में विजय दशमी का पर्व मनाते हैं। धार्मिक कथाओं के मुताबिक, इस दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। वहीं इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का अंत किया था। भक्त इस दिन मां दुर्गा और भगवान श्री राम की पूजा-अर्चना करते हैं।

फोटो: विपिन
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धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक इस दिन मां दुर्गा और भगवान श्री राम की पूजा-आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। इस दिन देश भर में रावण का पुतला भी जलाने का विधान है। ऐसा करके भक्त अपने अवगुणों को जीवन से बाहर निकालते हैं। दशहरा को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मानते हैं। दशहरे का दिन साल के सबसे पवित्र दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन किसी भी नए काम की शुरुआत की जा सकती है।

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जानें भारत की किन जगहों पर लगता है दशहरा का भव्य मेला

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में नवरात्रि सबसे भव्य तरकी से मनाया जाता है। यहां लोग न सिर्फ सुबह बल्कि शाम में भी दुर्गा पूजा के पूरे जश्न में डूबे रहते हैं। जहां एक तरफ नवरात्रि की दुर्गा पूजा की धूम होती है वहीं दशहरे में सिंदूर खेला की रस्म के साथ भव्य मेला लगाया जाता है। दशहरे के मेले के दौरान पंडालों में अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर कोलकाता की स्वादिष्ट मिठाइयां और व्यंजनों की धूम होती है।

हिमाचल प्रदेश

वहीं हिमाचल प्रदेश के कुल्लू का दशहरा भी काफी प्रसिद्ध है। यह त्यौहार एक भव्य अवसर है और नृत्य और इसमें संगीत प्रदर्शन होते हैं जो विभिन्न स्थानीय परंपराओं को प्रदर्शित करते हैं। पूरी कुल्लू घाटी को चमकीले रंगों के साथ सजाया जाता है और त्यौहार के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियों को मुख्य मैदान में ले जाने वाला एक विशाल जुलूस निकाला जाता है। इस त्यौहार का समापन व्यास नदी के किनारे लंका दहन के बहुत प्रसिद्ध प्रदर्शन के साथ होता है।


गुजरात

जबकि गुजरात नवरात्रि में 9 दिन जश्न में डूबा रहता है। रंग-बिरंगे लोक नृत्य जीवंत गरबा जिसमें न सिर्फ गुजरात बल्कि दूसरी जगहों से आए हुए लोग भी हिस्सा लेते हैं। त्योहार को जहां नवरात्र के रूप में मनाया जाता है और दिन और रात को देवी शक्ति की मूर्ति के चारों ओर आरती, देवी दुर्गा को प्रार्थना, प्रसाद और गरबा के प्रसिद्ध लोक नृत्य के प्रदर्शन से चिन्हित किया जाता है वहीं दशहरे के दौरान भी भव्य आयोजन होते हैं।

कर्नाटक

मैसूर में 'दशहरा' बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। मैसूर में दशहरा के दिन आज तक देवी के साहस और वीरता का वर्णन किया जाता है और इसे धूमधाम से मनाया जाता है। इस समारोह के लिए, कई सैन्य परेड, एथलेटिक प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रदर्शन प्रदर्शित किए जाते हैं। इस पूरे त्योहार में शाही परंपरा की विरासत को आगे बढ़ाया जाता है और मैसूर पैलेस को भव्य रूप से सजाया जाता है।


ये तो थे कुछ प्रसिद्ध शहर और राज्य जहां नवरात्रि और दशहरा बड़े भी भव्य तरीके से मनाया जाता है। वैसे नवरात्रि पूरो देश में ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। राजधानी दिल्ली के रामलीला भी देश भर में प्रसिद्ध हैं। तो वहीं दशहरे के दिन रावण दहन भी बड़े भव्य तरीके से मनाया जाता है। रामलीला मैदान और लाल किले पर होने वाले रावण दहन में बड़े-बड़े नेता से लेकर मंत्री और प्रधानमंत्री तक शामिल होते हैं।

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