कई चुनौतियों का सामना कर रही अर्थव्यवस्था, लगातार गहराती जा रही असमानताएं, सार्थक कदम उठाने की जरूरत: कांग्रेस
जयराम रमेश ने कहा, “अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफे के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं।"

कांग्रेस ने सोमवार को उम्मीद जताई कि आगामी केंद्रीय बजट में निजी कॉरपोरेट निवेश में सुस्ती और आय में बढ़ती असमानताओं जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। पार्टी ने कहा कि वास्तविकता में उच्च जीडीपी वृद्धि दरें तभी टिकाऊ रहेंगी जब इन मुद्दों का समाधान किया जाएगा।
कांग्रेस के प्रभारी महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि घरेलू बचत दरों में काफी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है और संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।
रमेश ने कहा कि अब देखना यह है कि आने वाले बजट में सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार किया जाता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाया जाता है या नहीं।
आगामी संसद सत्र के कार्यक्रम की घोषणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2026-27 का बजट अब से 20 दिन बाद पेश किया जाएगा।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “यह बजट निस्संदेह 16वें वित्त आयोग की सिफ़ारिशों को प्रतिबिंबित करेगा, जिसने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। ये सिफारिशें 2026-27 से 2031-32 की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे तथा राज्यों के बीच इन राजस्व के वितरण से संबंधित हैं।”
रमेश ने कहा, “मनरेगा को बुलडोजर से खत्म करने वाले नए क़ानून में लागू किए गए 60:40 के अनुपात से लागत को साझा करने के फॉर्मूले को लेकर पहले ही बेहद चिंतित राज्य सरकारें अब निश्चित रूप से और भी ज़्यादा आशंकित होंगी।”
उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें तीन सबसे प्रमुख हैं। पहला, टैक्स में कटौती और अच्छे मुनाफे के बावजूद निजी कॉरपोरेट निवेश की दरें अब भी स्पष्ट रूप से सुस्त बनी हुई हैं। दूसरा, घरेलू बचत दरों में काफ़ी गिरावट आई है, जिससे निवेश की क्षमता सीमित हुई है। तीसरा, संपत्ति, आय और उपभोग से जुड़ी असमानताएं लगातार गहराती जा रही हैं।”
कांग्रेस महासचिव ने कहा, “अब देखना यह है कि आने वाला बजट सांख्यिकीय भ्रमों के अपने आरामदेह दायरे से बाहर निकलकर इन वास्तविकताओं और चुनौतियों को स्वीकार करता है या नहीं, और उनसे निपटने के लिए कोई सार्थक कदम उठाता है या नहीं।”
उन्होंने कहा कि रोज़गार सृजन के बड़े पैमाने पर विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक उच्च जीडीपी वृद्धि दरें भी तब तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं, जब तक ये कदम अभी नहीं उठाए जाते।
संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को शुरू होगा और दो अप्रैल को समाप्त होगा।
सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा कक्ष में लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेंगी और आम बजट प्रस्तुत करेंगी।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बजट पेश किए जाने की तारीख के बारे में विवरण साझा नहीं किया है। इस वर्ष बजट दिवस यानी एक फरवरी को रविवार है। बजट सत्र में 13 फरवरी से नौ मार्च तक अवकाश रहेगा।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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