मीडिया की हालत पर मनमोहन सिंह ने जताई चिंता, बोले- आज देश की आजादी को खतरा, ईमानदार पत्रकारों की सख्त जरूरत

संडे नवजीवन के महात्मा गांधी विशेषांक के विमोचन में देश के हालात पर चिंता जताते हुए पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा कि आज देश को ईमानदार पत्रकारों की सख्त जरूरत है। वहीं, मृणाल पांडे ने लोगों को बताया कि समूह की टीम बहुत छोटी है, लेकिन इरादे बहुत बड़े हैं।

फोटोः नवजीवन
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नवजीवन डेस्क

पंजाब के मोहाली में संडे नवजीवन के महात्मा गांधी विशेषांक के विमोचन समारोह में देश के वर्तमान हालात पर गहरी चिंता जताते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आज देश की आजादी खतरे में और ऐसे समय में ईमानदार पत्रकारों की बहुत ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को आज ऐसे पत्रकारों की जरूरत है जो सच्चाई से और ईमानदारी के नाम पर कोई कारोबार ना करें और देश के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा, “मेरी ये ख्वाहिश है कि नवजीवन खूब फले-फूले और हिंदुस्तान के कोने-कोने में जाए और यह एक बार फिर महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़े।”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी का आंदोलन जो पूरे देश में फैला वह 1919 में हुए जालियांवाला बाग हत्याकांड का असर था और काफी संघर्ष के बाद हमें हासिल हुई। अब इस आजादी की हिफाजत करना हमारी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री ने अपनी ख्वाहिश का इजहार करते हुए एसोसिएटेड जनरल्स लिमिटेड के अध्यक्ष मोती लाल वोरा से कहा कि वह पंजाब की जमीन से नवजीवन का पंजाबी एडिशन निकालें, जिसका वहां मौजूद लोगों ने भरपूर तालियों से स्वागत किया।

संडे नवजीवन के विमोचन समारोह में मौजूद नेशनल हेराल्ड समूह की सलाहकार संपादक मृणाल पांडे ने कहा कि नवजीवन की कामयाबी निश्चित है, क्योंकि इसके पीछे सच्चाई की ताकत है। उन्होंने इस अवसर पर मेहमानों को बताया कि समूह की टीम बहुत छोटी है, लेकिन इरादे बहुत बड़े हैं। ऑफिस में वेबसाइट और प्रिंट एडीशन के सभी साथी एक साथ काम करते हैं और सभी एक-दूसरे का भरपूर सहयोग करते हैं।

समूह की वेबसाइटों का जिक्र करते हुए मृणाल पांडे ने कहा, “साल भर के अंदर हमारी उर्दू वेबसाइट कौमी आवाज देश में उर्दू का सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला पोर्टल बन गयी है। इसके अलावा नवजीवन की वेबसाइट भी लॉंच होते ही लोगों में लोकप्रिय हो गई और लगातार बढ़ रही है।” अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू तीनों भाषाओं की वेबसाइट की कामयाबी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि पोर्टल के बाद प्रिंट एडिशन को भी कामयाबी मिलेगी।

Published: 10 Dec 2018, 5:03 PM
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