'मौजूदा जाति जनगणना प्रक्रिया में खामियां, सटीक आंकड़े सामने आने से रोकने की तैयारी', अशोक गहलोत ने मोदी सरकार को घेरा

अशोक गहलोत ने कहा कि यह स्थिति महज संयोग नहीं लगती, बल्कि केंद्र की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जाति जनगणना के मूल उद्देश्य को कमजोर किया जा सके और सटीक आंकड़े सामने आने से रोके जा सकें।

'मौजूदा जाति जनगणना प्रक्रिया में खामियां, सटीक आंकड़े सामने आने से रोकने की तैयारी', अशोक गहलोत ने मोदी सरकार को घेरा
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया को पूरी तरह से दोषपूर्ण बताया है और केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति महज संयोग नहीं लगती, बल्कि केंद्र की एक सोची-समझी रणनीति है ताकि जाति जनगणना के मूल उद्देश्य को कमजोर किया जा सके और सटीक आंकड़े सामने आने से रोके जा सकें।

गहलोत ने कहा कि जब जाति जनगणना की घोषणा हुई थी, तो सभी ने इसका स्वागत किया था। हालांकि, जिस तरह से अब भ्रम पैदा किया जा रहा है, उससे केंद्र सरकार के इरादों पर गंभीर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने "ओपन-एंडेड सवाल" (खुले-समाप्त सवाल) का तरीका अपनाया है, जिसके तहत हर व्यक्ति की जाति ठीक वैसी ही दर्ज की जाएगी, जैसा वे बताएंगे।


भारत में एक ही जाति को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों, उप-जातियों और भाषाई रूपों से जाना जाता है। नतीजतन, एक ही जाति हजारों अलग-अलग नामों में बंट सकती है, जिससे अंतिम डेटा अविश्वसनीय और व्यावहारिक रूप से बेकार हो जाएगा।

गहलोत ने कहा कि सबसे गंभीर चिंता यह है कि जनगणना में "अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)" शब्द को शामिल ही नहीं किया गया है।

इस वजह से पिछड़े वर्गों की आबादी का सही-सही पता लगाना मुमकिन नहीं होगा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि जातियों की एक पूरी लिस्ट पहले ही तैयार कर ली जाए। उन्होंने कहा कि 2024 में तेलंगाना और 2022 में बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह के तरीके अपनाए गए थे।


गहलोत ने मांग की कि केंद्र सरकार तुरंत इस गलत प्रक्रिया को वापस ले और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से बातचीत करके एक नई प्रश्नावली (सवाल-सूची) तैयार करे।

उन्होंने कहा कि जाति जनगणना तभी अपना मकसद पूरा कर सकती है, जब उससे देश की सामाजिक सच्चाई को दिखाने वाला सही और सार्थक डेटा मिले। सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और समाज के पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए असरदार नीतियां बनाने के लिए ऐसा डेटा बहुत जरूरी है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ