18 सालों तक देश के लिए खतरा बना रहा अब्दुल मजीद, पूछताछ में उगले हैरान करने वाली सच्चाई 

अब्दुल मजीद नाम के एक शख्स को उसके भाइयों के साथ उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जलालाबाद से पकड़ा गया है। अब्दुल ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। म्यांमार का मूल निवासी अब्दुल मजीद करीब 18 साल पहले भारत में अपने पिता और भाई के साथ घुसा था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पुलिस ने म्यांमार के एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो यहां 18 सालों से अवैध तरीके से रह रहा था। अब्दुल मजीद नाम के एक शख्स को उसके भाइयों के साथ उत्तर प्रदेश के शामली जिले के जलालाबाद से पकड़ा गया है। अब्दुल ने पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। म्यांमार का मूल निवासी अब्दुल मजीद करीब 18 साल पहले भारत में अपने पिता और भाई के साथ घुसा था। 18 सालों तक वह देश के कई हिस्सों में बेखौफ घूमता रहा और न ही पुलिस को और न ही खुफिया विभाग को उसकी कोई भनक लगी। इतना ही नहीं पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ फर्जी सूचनाओं पर भारतीय दस्तावेज हासिल करने पर कई विभागों की कार्रवाई भी सवालों के घेरे में आ गई है।

पुलिस के अनुसार माजिद 2001 में म्यांमार से बांग्लादेश के रास्ते अपने पिता और एक भाई के साथ भारत में दाखिल हुआ। वह बांग्लादेश के नाकूरा रास्ते से बिलोनिया बॉर्डर को अवैध रूप से पार कर कोलकाता पहुंचा। वहां पर कुछ दिन रहने के बाद उत्तर प्रदेश में आया। 2004 में शामली पहुंचा और इसके बाद कर्नाटक, उज्जैन समेत कई स्थानों पर घूमता रहा। मजीद ने अपने सारे फर्जी दस्तावेज शामली में ही बनवाए। उसने यहां फर्जी सूचनाओं और दस्तावेजों के आधार पर पैन कार्ड, एक ही नंबर के दो आधार कार्ड बनवाए और दो बैंकों में खाते भी खुलवा लिए। इतना ही नहीं वो इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर अपन भाई को नौकरी के लिए मलेशिया भेजने में कामयाब हो गया।

पूछताछ में मजीद ने पुलिस को बताया है कि उसके पिता का निधन हो चुका है। वो यहां घर भी खरीद लिया है। उसने जलालाबाद की खुशनुमा कॉलोनी में करीब पांच लाख 60 हजार रुपये में मकान भी खरीद लिया है। वो जलालाबाद के कई मदरसों में भी पढ़ा चुका है। इतना सब कुछ होने के बाद भी उसकी असलियत किसी के सामने नहीं आई। मजीद अपने तीन और भाइयों को बुलाने में बी कामयाब रहा। वो यहां अपने भाइयों को मुफ्ती की डिग्री दिलाने के बहाने बुलाया था। तीनों भाई यहां टूरिस्ट वीजा पर पहुंचे थे। वीजा खत्म होने के बाद भी वो वापस नहीं गए बल्कि उन्होंने नाम बदलकर शरणार्थी का दर्जा पाने के लिए संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) में रजिस्ट्रेशन कराने में सफलत हो गए।

इस तरह इतने साल बिना किसी सूचना के देश में रह रहे मजीद के पकड़े जाने के बाद देश की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां ये पता करने में जुट गई है कि उसका यहां आने का मकसद क्या था। कहीं वो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त तो नहीं है। वहीं पुलिस और खुफिया टीम इस बात की भी जांच में जुटी है कि इन लोगों की मदद करने वाले और शरण देने वालों में कौन-कौन शामिल रहे हैं।

Published: 30 Jul 2019, 3:00 PM
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