सांसद निधि में हेरफेर : क्या स्मृति ईरानी को बचा रही है गुजरात सरकार?

सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि ईरानी के दखल के बाद शारदा मजदूर कामगार सहकारी समिति को ₹ 80 लाख का ठेका दिया गया था।

स्मृति ईरानी की फाइल फोटो
स्मृति ईरानी की फाइल फोटो
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विश्वदीपक

मोदी सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत का दावा करती हो, लेकिन उसके अपने मंत्री एक किस्म के भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। केंद्र की ताकतवर मंत्री स्मृति ईरानी पर आरोप है कि उन्होंने अपनी सांसद निधि का पैसा नियमों के खिलाफ जाकर एक ही संस्था को दिया। इस भ्रष्टाचार पर भले ही नेशनल मीडिया ने चुप्पी साध रखी हो, लेकिन गुजरात हाईकोर्ट ने गुजरात की बीजेपी सरकार से इस पर स्पष्टीकरण तलब किया है। लेकिन, गुजरात सरकार हाईकोर्ट के निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए स्मृति ईरानी को बचाने की कोशिश कर रही है। हाईकोर्ट ने 27 जुलाई को गुजरात सरकार से एक सप्ताह में जवाब मांगा था, लेकिन डेढ़ महीना गुजर जाने के बावजूद अभी तक सरकार की तरफ से कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।

गुजरात की अंकलाव विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक अमित चावडा ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी ने अपने गोद लिए गांव मगराऊं में विकास के नाम पर अपनी सांसद निधि के पैसे की हेरफेर की है। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, और स्मृति ईरानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

'नवजीवन' से फोन पर बात करते हुए चावडा ने कहा कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस देकर एक सप्ताह में जवाब मांगा था, लेकिन सरकार ने अभी तक इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया चावडा ने आरोप लगाया है स्मृति ईरानी को इस बात की पूरी जानकारी है कि किस तरह उनके गोद लिए गांव में विकास कार्यों के ठेकों में पैसे की हेरफेर हो रही है। उनका कहना है कि, "जो भी मैंने कहा है वह सीएजी रिपोर्ट पर आधारित है। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि ईरानी के दखल के बाद शारदा मजदूर कामगार सहकारी समिति को ₹ 80 लाख का ठेका दिया गया था। मैंने मंत्री के खिलाफ गहराई से जांच की मांग की है।"

इस मामले में सांसद निधि नियमावली के इन नियमों का उल्लंघन हुआ है:

  • कोई भी सांसद सीधे किसी भी कंपनी या समूह को काम नहीं सौंप सकते। जो भी काम हो, वह जिला नियोजन अधिकारी के माध्यम से ही होना चाहिए।
  • किसी भी काम या ठेके की लागत अगर ₹ 50 लाख से अधिक है तो वह काम किसी एक समूह या कंपनी को नहीं दिया जा सकता।

लेकिन, इस मामले में ₹ 80 लाख का ठेका एक ही समूह को दे दिया गया।

यह बात भी महत्वपूर्ण है कि गुजरात सीएजी ने सांसद निधि के पैसे के बंटवारे में सरकार / मंत्री की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। अपनी याचिका में कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया है कि, “ईरानी ने हेरफेर कर सांसद निधि के पैसे का दुरुपयोग किया है।”

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में आणंद के जिला कलेक्टर ने 20 जून 2017 को सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव को पत्र लिखकर सांसद निधि में हो रही हेरफेर की जानकारी दी थी।

कुछ स्थानीय अखबारों में छपी खबरों के मुताबिक एसएमकेएसएस को कुल ₹ 1.23 करोड़ के ठेके मिले थे, लेकिन इसने अभी तक किसी भी काम को पूरा नहीं किया है। उधर जिला नियोजन अधिकारी ने कथित तौर पर कहा है कि एसएमकेएसएस को ठेके देने के लिए उन्हें स्मृति ईरानी के पीए ने फोन पर निर्देश दिए थे।

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