'ज्ञानेश कुमार को हटाया जाए, SIR पर तत्काल रोक लगे', वाम दलों ने CEC चयन समिति पर भी उठाए सवाल
वामपंथी दलों के नेताओं ने दोनों निर्वाचन आयुक्तों के मतदाता डेटाबेस के क्रमिक केंद्रीकरण और राज्य तथा निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की पहुंच पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई।

सीपीएम, सीपीआई और सीपीआई (माले)-लिबरेशन ने जारी किया संयुक्त बयान
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग
वाम दलों की निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए पुरानी व्यवस्था अपनाने की मांग
वाम दलों ने निर्वाचन आयोग से जुड़े विवाद के बीच बृहस्पतिवार को कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के साथ मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए।
वाम दलों के संयुक्त बयान में क्या?
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव एम ए बेबी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के महासचिव डी राजा और सीपीआई (माले)-लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने एक संयुक्त बयान में यह भी कहा कि दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों से निर्वाचन आयोग के कामकाज और उसकी स्वतंत्रता को लेकर ‘‘गंभीर सवाल’’ खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग से जुड़े खुलासों से विपक्षी दलों और नागरिक समाज संगठनों द्वारा पहले उठाई गई चिंताओं को बल मिलता है तथा यह दावा कमजोर होता है कि एसआईआर और मतदाता सूची का प्रबंधन पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है।
वामपंथी दलों का आरोप
वामपंथी दलों के नेताओं ने दोनों निर्वाचन आयुक्तों के मतदाता डेटाबेस के क्रमिक केंद्रीकरण और राज्य तथा निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की पहुंच पर लगाई जा रही पाबंदियों को लेकर भी चिंता जताई।
उन्होंने दावा किया कि सॉफ्टवेयर संबंधी पाबंदियों के कारण गोवा में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को 97 मतदाताओं को पात्र पाए जाने संबंधी अपने फैसले दर्ज करने में दिक्कत हुई।
वाम नेताओं ने कहा कि मुद्दा केवल एसआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग के पारदर्शी और लोकतांत्रिक कामकाज तथा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संरक्षण से भी जुड़ा है।
वाम दलों की मांगें
उन्होंने मांग की, ‘‘ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया जाए, एसआईआर प्रक्रिया रोकी जाए और जिन लोगों के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके मतदान के अधिकार बहाल किए जाएं।’’
वाम दलों ने निर्वाचन आयोग के ‘‘स्वतंत्र और लोकतांत्रिक’’ कामकाज को बहाल करने तथा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था को बदलने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के प्रधान न्यायाधीश की उपस्थिति वाली चयन समिति पर आधारित व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।
विरोध प्रदर्शन का ऐलान
इन तीनों दलों ने 26 सितंबर से दो अक्टूबर तक देशभर में एक सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
उन्होंने गैर-बीजेपी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों तथा संबंधित नागरिकों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
दरअसल, अंग्रेजी दैनिक ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में दावा किया गया है कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने देशभर में मतदाता सूची के एसआईआर के दौरान नाम जोड़े और हटाए जाने समेत कई मुद्दों पर आपत्तियां जताई थीं।
दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने कहा कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग मत होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा उसके सभी फैसले स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप हैं।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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