बुलंदशहर: यूपी के डीएसपी ने हिंसा पर जताया दुख, कहा, नफरत की संस्कृति किसी ‘सुबोध कुमार’ को जिंदा नहीं छोड़ेगी

सांस्थानिक संकट की स्थिति की तरफ इशारा करते हुए 34 वर्षीय डीएसपी ने अपने पोस्ट में लिखा कि कैसे बढ़ती मॉब संस्कृति संविधान के लिए खतरा बन गई है और इसने अपनी पेशेवर भूमिका को निभाने वाले पुलिस वालों की जिंदगी को भी खतरे में डाल दिया है।

By आशुतोष शर्मा

उत्तर प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी ने देश में बढ़ती मॉब हिंसा की संस्कृति को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की भीड़ द्वारा की गई हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

भदोही जिले में कार्यरत डीएसपी अभिषेक प्रकाश ने मृत पुलिस अफसर के बेटे अभिषेक सिंह की निजी क्षति के बावजूद भी बहादुराना तरीके से उसका सामना करने के लिए प्रशंसा की।

डीएसपी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “मैं सलाम करता हूं अभिषेक को जो अपने पिता के मरने के बाद भी हिंसा व नफरत की भाषा को नही फैला रहा है।”

अभिषेक सिंह ने एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था, “आज मेरे पिता की मौत हुई है। कल भीड़ किसी बड़े पुलिस अधिकारी को मार देगी। उसके बाद किसी मंत्री की बारी आएगी। क्या मॉब हत्या की इस संस्कृति को बढ़ने दिया जा सकता है? कतई नहीं।”

सांस्थानिक संकट की स्थिति की तरफ इशारा करते हुए 34 वर्षीय डीएसपी ने अपने पोस्ट में लिखा कि कैसे बढ़ती मॉब संस्कृति संविधान के लिए खतरा बन गई है और इसने अपनी पेशेवर भूमिका को निभाने वाले पुलिस वालों की जिंदगी को भी खतरे में डाल दिया है। उन्होंने लिखा, “संविधान की आत्मा ऐसे ही नहीं मरेगी, उसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है! और उसके लिए जरूरी है कि एक ऐसी ही भीड़, ऐसा ही उन्माद और ऐसे ही सोच के बीज बो दिएं जाएं, जो धीरे-धीरे संविधान की हत्या स्वयं कर देगी!” उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में सुबोध सिंह की हत्या को देखा जाना चाहिए।

अपने पोस्ट में उन्होंने पुलिस सुधारों पर बल दिया जिसका देश में लंबे समय से इंतजार हो रहा है।

उन्होंने पोस्ट के आखिर में भावुकता के साथ लिखा, “लेकिन नफ़रत की खेती जब लगातार होगी तो बीज वृक्ष बनेगा ही, तब कोई एक सुबोध सिंह नही रहेगा हम सभी 'सुबोध' हो जाएंगे! हो सकता है कि कोई गोली हमारा भी इंतज़ार कर रही हो!”

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