मजिस्ट्रेट की हिम्मत कैसे हुई?, CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्र को नोटिस भेजे जाने पर भड़के CJI सूर्यकांत

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

'BCI दखल देने वाला कौन होता है?' NALSAR विवाद पर भड़के CJI सूर्यकांत, बोले- यह छात्रों और मेरे बीच का मामला है
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सुप्रीम कोर्ट ने छात्र को नोटिस जारी किए जाने के मामले को लेकर ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मैजिस्ट्रेट को जमकर फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने सवाल किया कि आखिर मजिस्ट्रेट ऐसा करने की हिम्मत कैसे कर सकता है। गौरतलब है कि जिस छात्र को ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 130 के तहत नोटिस भेजा गया, वह कथित तौर पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व वाले छात्र प्रदर्शन में शामिल हुआ था।

CJI सूर्यकांत ने नोटिस पर क्या कहा?

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने पूछा कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि शीर्ष अदालत पहले ही निर्देश दे चुकी है कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष एक वकील ने इस मामले का उल्लेख किया। वकील ने कहा कि छात्रों पर ‘‘प्रयोग’’ किया जा रहा है और यह नोटिस भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत था। हालांकि, नोटिस बाद में वापस ले लिया गया।

सीजेआई ने कहा, ‘‘आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। हमारे युवाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है। हमने स्पष्ट आदेश पारित किया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमें हैरानी है कि मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं, जबकि हमने पहले ही किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया है। यह बिल्कुल स्पष्ट आदेश था।’’


प्रधान न्यायाधीश ने वकील से मामले के तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा। उन्होंने कहा, ‘‘हम स्पष्टीकरण मांगेंगे। उन्हें बताने दीजिए कि ऐसा क्यों किया गया।’’ पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।

क्या है पूरा मामला

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया था कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉजपा की अगुवाई में हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर शामिल होने के मामले में ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था। नोटिस में शांति बनाए रखने के लिए छात्र से पांच लाख रुपये का निजी मुचलका भरने को कहा गया था। हालांकि, बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया।

छात्र अक्षत त्रिपाठी ने हालांकि आरोपों से इनकार किया और कहा कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्वक हिस्सा लिया था तथा उस समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहा था। यह नोटिस चार सितंबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 130 के तहत जारी किया गया था।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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