बीएसएनएल और एयर इंडिया के बाद डाक विभाग की भी हालत खस्ता, घाटा पहुंचा 15 हजार करोड़ रुपए के पार

वित्तीय वर्ष 2016 में डाक विभाग का राजस्व घाटा 150 प्रतिशत बढ़कर 6,007 करोड़ पहुंच गया था। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर 15,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो गया है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मोदी सरकार में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। एयर इंडिया, बीएसएनएल के बाद अब डाक विभाग का हालत भी खस्ता हो गई है। पिछले तीन सालों में भारतीय डाक विभाग का राजस्व घाटा कई गुणा बढ़ा है। वित्तिय वर्ष 2016 में डाक विभाग का राजस्व घाटा 150 प्रतिशत बढ़कर 6,007 करोड़ पहुंच गया था। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष में यह बढ़कर 15,000 करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो गया है। इस तरह डाक विभाग भारत संचार निगम लिमिटेड और एयर इंडिया को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा नुकसान वाला सार्वजनिक उपक्रम बन गया है।

बता दें कि वित्तीय वर्ष 2018 में बीएसएनएल 8,000 करोड़ के घाटे में था और एयर इंडिया 5,340 करोड़ के घाटे में, लेकिन डाक विभाग ने इन दोनों को पीछे छोड़ दिया है।

भारतीय डाक विभाग के राजस्व का करीब 90 फीसदी हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और भत्ते में जाता है। केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों की वजह से कर्मचारियों के वेतन में तेजी से वृद्धि हुई है। डाक विभाग का का वेतन और भत्ते की लागत वित्त वर्ष 2019 (संशोधित अनुमान) में 16,620 करोड़ रुपये थी, वहीं, कुल राजस्व 18,000 करोड़ रुपये है। यदि पेंशन के रूप में दिए जाने वाले 9,782 करोड़ रुपये को भी जोड़ दिया जाए तो यह पिछले वित्त वर्ष में कुल 26,400 करोड़ हो जाता है।

खबरों की मानें तो डाक विभाग द्वारा अपने प्रदर्शन में सुधार लाने और राजस्व बढ़ाने का प्रयास सफल नहीं हो पाया। इसकी वजह उत्पाद लागत और कीमत में भारी अंतर के साथ-साथ पारंपरिक मेल सेवाओं के लिए सस्ता और तेज सेवाओं की उपलब्धता है।

बता दें कि भारतीय डाक विभाग को नेशनल सेविंग स्कीम और सेविंग सर्टिफिकेट्स से सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है। वर्ष 2017 में पूरे राजस्व का 60 प्रतिशत यानि 11,511 करोड़ यहीं से प्राप्त हुआ था। वहीं विभाग ने दिसंबर 2013 में अक्टूबर 2017 तक अपनी शुरुआत के बाद से सीओडी के तहत लगभग 2,600 करोड़ रुपये जुटाए थे।

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