हेडलाइन बनाने और लोगों को बेवकूफ़ बनाने के बजाय, असल में राहत देने पर ध्यान दे सरकार, उत्पाद शुल्क घटाने के फैसले पर खेड़ा
पवन खेड़ा ने हेडलाइन बनाने और लोगों को बेवकूफ़ बनाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह राहत असल में नहीं बल्कि सिर्फ कहानी है। उन्होंने कहा कि सरकार को कंज्यूमर्स को असल में राहत देने पर ध्यान देना चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों से निपटने में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की मदद करने के लिए पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया है और डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को कांग्रेस नेता और पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा ने हेडलाइन बनाने और लोगों को बेवकूफ़ बनाने वाला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि यह राहत असल में नहीं बल्कि सिर्फ कहानी है। उन्होंने कहा कि सरकार को कंज्यूमर्स को असल में राहत देने पर ध्यान देना चाहिए।
पवन खेड़ा का ट्वीट
पवन खेड़ा ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस खबर से जुडी ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा, “अगर आपने पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें 'कम होने' की हेडलाइन देखीं और सोचा कि सरकार ने आपकी जेब को राहत दी है – तो आप गलत हैं। अभी तक, डीलरों और कंज्यूमर्स के लिए कीमतें वही हैं।“
फैसले की असल सच्चाई
कांग्रेस नेता ने बताया कि इस फैसले की असल सच्चाई क्या है। उन्होंने कहा, “असल में जो कम हुआ है वह है ‘स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी’ – यह एक लेवी है जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां सरकार को देती हैं। ‘स्पेशल’ और ‘एडिशनल’ शब्द बताते हैं कि यह टैक्स कितना गैर-ज़रूरी है।“
उन्होंने आगे लिखा, “वेस्ट एशिया में लड़ाई शुरू होने के बाद से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां नुकसान उठा रही हैं। सरकार अब उस बोझ का एक छोटा सा हिस्सा शेयर करने के लिए राज़ी हुई है, लेकिन ‘स्पेशल एडिशनल’ लेवी कम कर रही है - वह भी लगभग एक महीने बाद।“
युद्ध के कारण दबाव में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां
गौरतलब है कि, वित्त मंत्रालय द्वारा 26 मार्च को जारी एक अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर तीन रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है जबकि डीजल पर यह शुल्क पहले के 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि शुल्क में यह कटौती तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
भारत में ईंधन विपणन कंपनियां दबाव में हैं क्योंकि अमेरिका एवं इजराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम स्थिर बने हुए हैं।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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