'ऑनलाइन कोचिंग में सरकारी संसाधनों का निवेश जवाबदेही से बचने की 'नौटंकी'', जयराम रमेश ने मोदी सरकार को घेरा

जयराम रमेश ने दावा किया कि सरकार की मौजूदा मुफ्त कोचिंग योजना भी पिछले तीन वर्षों से अपने लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है और ऐसे में इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की उसकी क्षमता पर भरोसा करना मुश्किल है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश
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कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि देश की ‘‘चरमराई’’ शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने और सार्वजनिक शिक्षा में निवेश बढ़ाने के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑनलाइन कोचिंग में सरकारी संसाधनों का निवेश करने का फैसला किया है, जो ‘‘जवाबदेही से बचने की एक नौटंकी’’ है।

जयराम रमेश का दावा

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि सरकार की मौजूदा मुफ्त कोचिंग योजना भी पिछले तीन वर्षों से अपने लक्ष्य को पूरा करने में विफल रही है और ऐसे में इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की उसकी क्षमता पर भरोसा करना मुश्किल है।

उनका कहना है, ‘‘सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को तीन वर्षों में मुफ्त कोचिंग के लिए 10,500 उम्मीदवारों का नामांकन करना था, लेकिन अब तक केवल 2,790 छात्रों का नामांकन हुआ है, जो लक्ष्य का महज 26 प्रतिशत है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा कि इस योजना का बजट हर वर्ष कम हुआ है और पिछले वर्ष इस मद में वास्तविक खर्च बजट के आधे से भी कम रहा।

उनके मुताबिक, ये तथ्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति की 10 अगस्त को पेश की गई नवीनतम रिपोर्ट में सामने आए हैं।


जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 17 जून को कोटा में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शिक्षा के एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाया था कि ‘‘एक शोषणकारी कोचिंग उद्योग’’ ने सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की जगह ले ली है और भारतीय परिवार अब कोचिंग केंद्रों पर केंद्र सरकार द्वारा शिक्षा पर किए जाने वाले खर्च की तुलना में 2.5 गुना अधिक खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि भारत की ‘‘चरमराई शिक्षा व्यवस्था’’ को बुनियादी तौर पर ठीक करने या सार्वजनिक शिक्षा में दोबारा निवेश करने के बजाय प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक संसाधनों को ऑनलाइन कोचिंग में लगाने का फैसला किया है।

जयराम रमेश का मोदी सरकार पर आरोप

जयराम रमेश ने आरोप लगाया, ‘‘यह जवाबदेही से बचने की एक नौटंकी है और यह सरकार पहले ही दिखा चुकी है कि इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने की उसकी क्षमता बेहद कम है।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार को भारत की ‘चरमराई’ शिक्षा व्यवस्था को बुनियादी तौर पर दुरुस्त करने और सार्वजनिक शिक्षा में फिर से निवेश करने की जरूरत है।

पीटीआई के इनपुट के साथ

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