जग्गी वासुदेव आने वाले समय के राम रहीम हैं: मेधा पाटकर

‘रैली फॉर रिवर’ निकालने वाले सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की नेता मेधा पाटकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मेधा ने कहा कि वह आने वाले समय के दूसरे राम रहीम साबित होंगे।

फोटोः सोशल मीडिया
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आईएएनएस

भोपाल में एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची मेधा पाटकर ने ईशा फाउंडेशन के जग्गी वासुदेव पर गंभीर सवाल उठाए। मेधा ने कहा, "जग्गी वासुदेव कौन है। बहुत कम लोगो जानते हैं कि इस पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप है। कोयंबटूर में ईशा फाउंडेशन का जो आश्रम है, वह संरक्षित वन क्षेत्र (रिजर्व फारेस्ट) में है। इस आश्रम के कई भवनों को तोड़ने के आदेश हैं। यह आश्रम जिस जगह है, वहां से एलीफेंट कॉरीडोर गुजर रहा है, इसकी वजह से वहां हाथियों की मौत हो रही है।"

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता ने आगे कहा, "जो व्यक्ति पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, वह अब नदी को बचाने के लिए 'रैली फॉर रिवर' निकाल रहा है, इसके पीछे कौन है। कौन है ये व्यक्ति, इसे जानना होगा। इनकी जहां-जहां रैली या कार्यक्रम होते हैं, उन मंचों पर अडानी व अंबानी और उनके समर्थकों के पोस्टर लगे होते हैं। वहीं तमाम राज्यों के मुख्यमंत्रियों को घेर रखा है। शिवराज सिंह चौहान ने अपने घर आमंत्रित किया और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उनकी तारीफ कर रहे हैं।"

‘रैली फॉर रिवर’ के लिए चलाए गए मिस्डकॉल अभियान का जिक्र करते हुए मेधा ने कहा, "इस तरह के अभियान कई लोगों ने चलाए। उनके इस अभियान को समर्थन मिल रहा हो या इस अभियान से नदियां बचें यह मुख्य बात नहीं है। बुनियादी बात ये है कि उन्होंने कभी भी बड़े बांध, नदी प्रदूषण, खनन की बात ही नहीं की। बस वे नदी के दोनों ओर पेड़ लगाने की बात कर रहे हैं।"

मेधा ने आरोप लगाया, "जग्गी वासुदेव ने अपने अभियान के जरिए 800 करोड़ रुपये भी जुटाए हैं। वे पेड़ लगाने की बात तो करते हैं, मगर जो पेड़ डूब रहे हैं, उससे अनजान हैं। वे तो कॉरपोरेट के एजेंडे को पूरा कर रहे हैं। जिस दिन इन पर लगे आरोप साबित होंगे, उस समय ये राम रहीम की तरह सामने आएंगे। मगर आज उनके आगे मत्था टेकने का जो लोग काम कर रहे हैं, उनके खिलाफ समाज और नदी प्रेमियों को हम जागृत करेंगे।"

उन्होंने आगे कहा, "जग्गी वासुदेव को यह बताना चाहिए कि क्या वे नदियों के विशेषज्ञ हैं, अपने साथ वैज्ञानिकों को रखते हैं या यूं ही हर जगह अपने को नदी संरक्षक बनाकर पेश करते हैं।" मेधा ने औद्योगिक घरानों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा, "नदियां कॉरपोरेट का लक्ष्य बन गई हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि नदियों के पानी के बगैर उनका अभियान पूरा नहीं हो सकता। यही कारण है कि उद्योगपति नदी घाटी में जमीन मांग रहे हैं।"

नर्मदा नदी का जिक्र करते हुए मेधा ने कहा, "गुजरात में नर्मदा के पानी का बड़ा हल्ला प्रधानमंत्री द्वारा किया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि नर्मदा को गुजरात के लिए खत्म कर दिया गया है। सरदार सरोवर के नीचे की ही नर्मदा सूखी है। भरुच और एचुरी तक देखकर लौटी हूं, वहां देखा कि सरदार सरोवर से नारेश्वर तक सौ किलोमीटर नर्मदा सूख गई है।"

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