जेएनयू केसः एबीवीपी के पूर्व छात्र नेताओं का दावा, कन्हैया ने नहीं, एबीवीपी सदस्यों ने लगाए थे देश विरोधी नारे

जेएनयू मामले में आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी के दो पूर्व नेताओं ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जेएनयू में एबीवीपी के पूर्व पदाधिकारी रहे इन नेताओं ने कहा कि जेएनयू में देश विरोधी नारे वाले वीडियो में मौजूद छात्र एबीवीपी के सदस्य थे या उससे जुड़े हुए थे।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया
user

नवजीवन डेस्क

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 9 फरवरी 2016 को हुई घटना को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। बुधवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फेंस कर एबीवीपी की जेएनयू इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष जतिन गोराया और पूर्व संयुक्त सचिव प्रदीप नरवाल ने दावा किया कि एक न्यूज चैनल द्वारा जारी वीडियो में जेएनयू में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिख रहे छात्र एबीवीपी के सदस्य थे या संगठन से सहानुभूति रखने वाले छात्र थे। दोनों छात्र नेताओं ने दावा किया है वह अपने इस बयान पर अडिग हैं। बता दें कि जेएनयू में कथित राष्ट्र विरोधी नारेबाजी के मामले में जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत 10 लोगों के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने सोमवार को आरोपपत्र दाखिल किया है।

एबीवीपी की जेएनयू इकाई के पूर्व उपाध्यक्ष जतिन गोराया ने साफ तौर पर कहा कि जी न्यूज के डीएनए प्रोग्राम में दिखाए जा रहे चार वीडियो में से आखिरी वाले वीडियो में जितने लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं, वे सभी एबीवीपी से जुड़े हैं। गोराया ने साथ ही कहा कि उस वीडियो को लैब में जांच के दौरान सहीं पाया गया है और शायद जी न्यूज को नहीं पता है कि उस वीडियो में जो लोग नारे लगा रहे हैं वे एबीवीपी के लोग हैं। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर एबीवीपी के पदाधिकारियों से कभी भी बहस के लिए तैयार हैं।

वहीं, जेएनयू में एबीवीपी के पूर्व संयुक्त सचिव प्रदीप नरवाल ने कहा कि देश विरोधी नारेबाजी का जो वीडियो जी न्यूज ने दिखाया है, उसमें छेड़छाड़ की गई है। नरवाल ने कहा, “जब जी न्यूज और पुलिस का दावा है कि उस वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई है तो फिर पुलिस ने अपनी चार्टशीट में उस वीडियो को क्यों नहीं शामिल किया? वह वीडियो कहां है?” नरवाल ने भी वीडियो में दिख रहे लोगों के एबीवीपी से जुड़े होने का दावा करते हुए कहा कि आखिर उन लोगों के खिलाफ चार्जशीट क्यों नहीं दायर हुई?

दोनों पूर्व एबीवीपी नेताओं ने जेएनयू मामले में दायर आरोप पत्र को राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसके दाखिल किए जाने के समय पर सवाल उठाया है। गोराया ने कहा कि दलित छात्र रोहित वेमुला की मौत के बाद शुरू हुए छात्र आंदोलन को समाप्त करने के लिए जेएनयू में हुआ राजद्रोह विवाद पूरी तरह से सुनियोजित था।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने जेएनयू में 9 फरवरी 2016 को एक कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर देश विरोध नारेबाजी के आरोपों में जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य समेत 10 पूर्व छात्रों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। आरोपपत्र को कन्हैया समेत कई लोगों ने राजनीति से प्रेरित कदम बताया है। लोकसभा चुनाव से पहले आरोप पत्र दाखिल किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

बता दें कि 9 फरवरी 2016 की घटना के बाद जेएनयू परिसर में हुए झड़प के बाद एबीवीपी की जेएनयू इकाई के तत्कालीन संयुक्त सचिव प्रदीप नरवाल और उनके साथ दो अन्य ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। एबीवीपी की जेएनयू इकाई के तत्कालीन उपाध्यक्ष जतिन गोराया ने अगस्त 2016 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

लोकप्रिय
next