कठुवा-उन्नाव रेपः इंग्लैंड दौरे पर पीएम मोदी का होगा विरोध, मानवाधिकार संगठनों ने लिया फैसला

इंग्लैंड दौरे पर पीएम मोदी का विरोध करेंगे मानवाधिकार संगठन

कठुवा और उन्नाव रेप कांड को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधार संगठनों ने पीएम मोदी का इंग्लैंड में विरोध करने का फैसला किया है।

जम्मू के कठुवा और यूपी के उन्नाव रेप कांड को लेकर देश में विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का सामना कर रहे पीएम मोदी को अपने आगामी इंग्लैंड दौरे के दौरान भी मानवाधिकार संगठनों के भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है। इन घटनाओं को लेकर इंग्लैंड में रह रहे दक्षिण एशियाई और भारतीय समुदाय के लोगों में खासी नाराजगी है। ये लोग पीएम मोदी के दौरे के दौरान लंदन के डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर उनका भारी विरोध करने की तैयारी कर रहे हैं। ये लोग पीएम मोदी से इस बात का जवाब चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर सरकार में बीजेपी के मंत्रियों ने कैसे और क्यों रेप के आरोपियों का समर्थन किया और उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप में आरोपी बीजेपी विधायक को आखिर क्यों इतने लंबे समय तक बचाया जाता रहा। वे लोग पीएम मोदी से इस बात का सीधा जवाब चाहते हैं कि क्यों देश में महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है।

इंग्लैंड में पीएम मोदी का विरोध ‘मोदी नॉट वेलकम’ के बैनर तले किया जाएगा। इस विरोध का आयोजन ‘साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप’, ‘कास्टवाच यूके’ और ब्रिटेन की महिला संगठनों द्वारा किया गया है। मोदी सरकार में बलात्कार की बढ़ती संस्कृति और बलात्कारियों को बचाने के विरोध में 18 अप्रैल को 50 से अधिक महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद एक पत्र जारी करेंगी।

‘दक्षिण एशिया सॉलिडेरिटी ग्रुप’ की प्रवक्ता ने नवजीवन को बताया कि डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर, जहां प्रधानमंत्री मोदी थेरेसा मे से मुलाकात करने वाले हैं, लगभग 2000 लोगों के एकत्र होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि पूरे ब्रिटेन से प्रदर्शनकारी आ रहे हैं। इनमें कश्मीरी, सिख संगठनों, तमिलों और कई महिलावादी संगठन के लोग शामिल होंगे, जो आसिफा और उत्तर प्रदेश में एक नाबालिग के साथ बलात्कार की भयावह घटना से सकते में हैं। प्रवक्ता ने खुले तौर पर कहा, "हम लोग मोदी का एक फासीवादी, बलात्कारियों के रक्षक और मुसलमानों और दलितों की भीड़ द्वारा पीटकर हत्या के अगुवा के रुप में विरोध कर रहे हैं। हम गौरी लंकेश जैसे असहमत लोगों की हत्या के लिए भी मोदी का विरोध कर रहे हैं।"

‘कास्टवाच यूके’ भी दलितों और पिछड़ों के खिलाफ बर्बर हमले की घटनाओं से नाराज है। उन्होंने बताया कि दलितों पर बढ़ते हमलों और अत्याचारों ने भय का माहौल बनाया है। अपराधी आजाद घूम रहे हैं और पीड़ितों और उनके परिवारों को प्रताड़ित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी को जवाब देना चाहिए कि ये सब क्यों हो रहा है।

गौरलब है कि 2015 में भी ब्रिटेन में मोदी के खिलाफ इसी तरह का व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुआ था।

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