कोरोना पर बुरी फंसी खट्टर सरकार, ऑक्सीजन की कमी से मौत के मामलों की जांच कराने को हुई तैयार, किसानों के मुद्दे पर वॉकआउट

कोरोना पर हरियाणा सरकार बुरी तरह फंस गई है। विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन सदन में ऑक्‍सीजन की कमी से प्रदेश में एक भी मौत न होने का बयान देने वाले मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल अपने ही बयान में उलझ गए।

फोटो: सोशल मीडिया
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धीरेंद्र अवस्थी

कोरोना पर हरियाणा सरकार बुरी तरह फंस गई है। विधानसभा में मानसून सत्र के पहले दिन सदन में ऑक्‍सीजन की कमी से प्रदेश में एक भी मौत न होने का बयान देने वाले मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल अपने ही बयान में उलझ गए। विधानसभा में आज विपक्ष ने सरकार को पूरी तरह घेरते हुए सीएम की ओर से पहले दिन दिए गए बयान पर जवाब मांगा। विपक्ष ने सीधे सीएम पर हमला बोलते हुए कहा कि वह बताएं कि पहले दिन के बयान पर वह अडिग हैं या अपना बयान वापस लेते हैं। सीएम के चेहरे के भाव साफ कह रहे थे कि उन्‍हें सीधा कोई जवाब नहीं सूझ रहा है। नतीजतन सदन में जमकर हंगामा बरपा और सरकार लीपा-पोती की कोशिश करती नजर आई।

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन सरकार के लिए मुश्किलें लेकर आया। विपक्ष सोमवार को रणनीति के साथ आया था। प्रश्‍नकाल के बाद आरंभ हुए शून्‍यकाल में सरकार पर हमले की कमान नेता विरोधी दल भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने संभाली। कांग्रेस के विधायक कोरोना पर चर्चा चाह रहे थे। स्‍पीकर तीन-तीन मिनट के लिए सभी को अपनी बात कहने का वक्‍त दे रहे थे। जिस पर हुड्डा ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह जीरो आवर चलाया जा रहा है वह गलत है। ऐसे ही चलाना है तो शून्‍यकाल बंद कर दो। जीरो आवर में कोई ज्‍वलंत मुद्दा ही उठाया जा सकता है। हुड्डा ने मुख्‍यमंत्री की ओर से सत्र के पहले दिन दिए गए बयान को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कहा कि सदन के नेता ने सदन को गुमराह किया है। कहा गया कि आक्‍सीजन की कमी से प्रदेश में कोई मौत नहीं हुई। हुड्डा ने उस वक्‍त अखबारों की सुर्खियां बनी खबरें पढ़ कर सुनाईं। इस पर सरकार की ओर से खुद स्‍पीकर ही मोर्चा लेते नजर आए। कहा, कि अखबारों की खबरें तथ्‍य नहीं हो सकतीं।

इस दौरान सदन में हंगामे की स्थिति थी और सरकार बैकफुट पर नजर आ रही थी। लिहाजा, दबाव में आए सीएम ने बयान दिया कि कल वह सदन में इस पर एक स्‍टेटमेंट देंगे। इस पर हुड्डा ने कहा कि वह अपनी पहले दी गई स्‍टेटमेंट वापस लें। एक हाईलेवल कमेटी बनाकर इसकी जांच करवाई जाए या तो सीएम यह कहें कि पहले दिन सदन में हमने जो कहा था वह सही कहा था। इस वक्‍त तक सरकार इतने दबाव में दिख रही थी कि सीएम कहने लगे कि आप इस पर सदन में आधा घंटा चर्चा कर सकते हैं। सवाल और जवाब के चल रहे दौर के बीच हुड्डा ने कहा कि इससे बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता। इस पर स्‍पीकर ने कहा कि जीरो आवर में उठाए गए सवाल का जवाब तुरंत देने के लिए सरकार बाध्‍य नहीं है।


एक तरफ स्‍पीकर सरकार के बचाव में यह तर्क दे रहे थे दूसरी तरफ दबाव में दिख रहे सीएम जवाब भी दिए जा रहे थे। स्‍पीकर के इस तर्क पर हुड्डा ने भी तंज भरे अंदाज में कहा कि सरकार जवाब तो दे रही है। स्‍पीकर और सरकार के तर्को के बीच हुड्डा ने फिर दोहराया कि हाउस को गुमराह किया गया है। सीएम ने कहा है कि एक भी आदमी की ऑक्‍सीजन की कमी से मौत नहीं हुई है। बताओ यह सच है कि नहीं। हुड्डा ने कहा कि पूरा हरियाणा सुन रहा है। मैं रिकार्ड में इस बात को लाना चाहता हूं। जो लोग ऑक्‍सीजन की कमी से मरे हैं उनकी आत्‍मा क्‍या कहेगी। स्‍पीकर को बार-बार सरकार की तरफ से मोर्चा लेते देख हुड्डा ने कहा कि दिक्‍कत यह है कि सरकार का भी जवाब आप देते हो। अंतत कल बयान देने की बात करने वाले मुख्‍यमंत्री जवाब देने के लिए खड़े हुए। सीएम ने कहा कि हिसार, गुरुग्राम और रेवाड़ी तीनों जगह मजिस्‍ट्रेट जांच के आदेश दिए गए थे। गुरुग्राम और रेवाड़ी से आई रिपोर्ट में ऑक्‍सीजन की कमी से मौत की बात नहीं की गई है।

हिसार के सोनी अस्‍पताल में लापरवाही से मौत होने की बात आई है। इस पर नेता विरोधी दल ने कहा कि ह्यूमन राइट कमिशन के आदेश पर हुई जांच रिपोर्ट में ऑक्‍सीजन की कमी से मौत की बात मानी गई थी। हुड्डा ने कहा कि हमें ऐतराज इस बात पर है कि कहा गया है कि एक भी मौत ऑक्‍सीजन की कमी से नहीं हुई है। मुख्‍यमंत्री किसी एक जगह की बात कर रहे हैं और मैं पूरे प्रदेश की बात कर रहा हूं। अंतत दबाव में आए सीएम को कहना पड़ा कि कमेटी बनाएंगे और जांच कराएंगे। लेकिन यहां भी सीएम ने बात साफ नहीं की। यह नहीं बताया कि किसकी कमेटी बनाएंगे और कौन जांच करेगा। जाहिर है, सरकार की कमजोर कड़ी यह मुद्दा उसके लिए गले की फांस बन गया। बुरी तरह घिरी सरकार इससे बचकर निकलने का रास्‍ता तलाश रही है।

किसानों पर भी हंगामा, विपक्ष का वाकआउट

किसानों के मसले पर भी चर्चा की मांग कर रहे विपक्ष के ध्‍यानाकर्षण और काम रोको प्रस्‍ताव रद्द कर बचने की कोशिश कर रही सरकार को जवाब देते नहीं बन रहा था। इस पर चर्चा की मांग कर रहे रघुवीर कादियान, किरण चौधरी, शंकुतला खटक, आफताब अहमद, गीता भुक्‍कल, रावदान सिंह और बीबी बत्रा समेत कांग्रेस के अधिकांश विधायक वेल पर आ गए और जमकर नारेबाजी की। स्‍पीकर के बात नहीं मानने पर सभी कांग्रेस विधायकों ने वाकआउट किया।

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