अयोध्या पर मध्यस्थता पैनल : कौन हैं जस्टिस कलीफुल्लाह, श्रीराम पंचू और श्री श्री रविशंकर!

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले को मध्यस्थता द्वारा हल करने के लिए पैनल का गठन किया है। जस्टिस इब्राहीम कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाले इस पैनल में आध्यात्मकि गुरु श्रीश्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचू शामिल हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या मामले का विवाद मध्यस्थता द्वारा सुलझाने का रास्ता अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए एक तीन सदस्यीय पैनल बनाया है जिसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस इब्राहीम कलीफुल्लाह होंगे। इसके अलावा आध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्री राम पंचू भी इस पैनल में शामिल हैं। आइये जानते हैं कि पैनल के लिए तय किये गए ये तीनों लोग कौन हैं?

1. फकीर मोहम्मद इब्राहीम कलीफुल्लाह

रिटायर्ड जस्टिस फकीर इब्राहीम कलीफुल्लाह भारत के तमिल नाडू से तल्लुक रखते हैं।कलीफुल्लाह ने चेन्नई में अपनी प्रैक्टिस शुरू की थी। साल 2000 में इन्हें मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया था। कुछ समय बाद इब्राहीम जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बनाए गए थे।

2 अप्रैल 2012 में कलीफुल्लाह ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर शपथ ली थी। 22 जुलाई 2016 को कलीफुल्लाह सुप्रीम कोर्ट जस्टिस के पद से रिटायर हुए। उनके रिटायरमेंट के समय, उस समय के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने कहा था कि जस्टिस कलीफुल्लाह ने बीसीसीआई केस में जिस तरह के सुझाव दिए वे सराहनीय हैं।

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2. श्री श्री रवि शंकर

तमिलनाडु में जन्में श्री श्री रवि शंकर ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ फाउंडेशन के संस्थापक हैं। इन्होंने 17 साल की उम्र में ही फिजिक्स की अग्रिम डिग्री हासिल कर ली थी। अयोध्या मामले में पहले भी कई बार इनका हस्तक्षेप रहा है। लेकिन हमेशा निराशा ही हाथ लगी। 2018 में अयोध्या मामले में मध्यस्थता को लेकर रवि शंकर ने कहा था कि मुस्लिम पक्ष को इस जमीन के बारे में विचार छोड़ देना चाहिए, क्योंकि यह उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। रवि शंकर ने कहा था, “ श्री राम की जन्म भूमि होने की वजह से हिन्दू समुदाय की इस जगह से गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं।” हालांकि रवि शंकर के इस अनुरोध को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सीधे तौर पर नकार दिया था।

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3. श्री राम पंचू

श्री राम पंचू चेन्नई के वरिष्ठ वकील हैं और पिछले 40 सालों से वकालत कर रहे हैं। मध्यस्थता मामलों में पंचू एक कमाल के वकील माने जाते हैं। लगभग 20 सालों से पंचू सक्रीय मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पंचू ने भारत का पहला मध्यस्थता कोर्ट 2005 में शुरु किया था और मध्यस्थता को भारतीय न्याय प्राणाली का अहम हिस्सा बनाए जाने के लिए काम किया।

मीडिएशन चैम्बर के संस्थापक श्री राम पंचू ने देश के कई विवाद मामलों को मध्यस्थता के जरिए हल कराया है।

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Published: 8 Mar 2019, 12:59 PM
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