चारा घोटालाः विशेष सीबीआई कोर्ट ने लालू यादव को दोषी करार दिया, मामले के अन्य आरोपी जगन्नाथ मिश्र बरी 

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े एक मामले में रांची की सीबीआई अदालत ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। जगन्नाथ मिश्र को इसी मामले में अदालत ने बरी कर दिया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

बहुचर्चित चारा घोटाला से जुड़े एक मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है। वहीं मामले के अन्य आरोपी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को इसी मामले में अदालत ने बरी कर दिया है। इस मामले में लालू प्रसाद समेत 15 लोगों को दोषी करार दिया गया है, जबकि जगन्नाथ मिश्र समेत 7 आरोपियों को बरी कर दिया गया है। इस मामले में कुल 22 आरोपी थे, जिन पर फैसला आना था। इश मामले में सभी दोषियों को 3 जनवरी 2018 को सजा सुनाई जाएगी। यह मामला देवघर कोषागार से अवैध निकासी से जुड़ा है। फैसले के बाद लालू यादव समेत सभी दोषियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया गया। बाद में सभी दोषियों को रांची की बिरसा मुंडा जेल ले जाया गया।

फैसला आने के बाद अपनी प्रतिक्रिया में लालू यादव ने ट्वीट कर कहा, “सच्चाई को प्रचार के जरिये एक झूठ की तरह पेश किया जा सकता है। लेकिन एक दिन यह पूर्वाग्रह और घृणा खत्म होगी और सच्चाई सामने आएगी।” एक अन्य ट्वीट मे लालू यादव ने कहा, मैं मरते दम तक सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ता रहूंगा। जगदेव बाबू ने गोली खाई थी, हम जेल जाते रहते हैं, लेकिन मैं झुकूंगा नहीं। लड़ते-लड़ते भले मर जाऊंगा, लेकिन मनुवादियों को हराऊंगा।

फैसले के बाद लालू यादव की पार्टी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर निराशा जताई और कहा कि लालू यादव पूरे मामले में निर्दोष हैं। राजद ने कहा कि पार्टी को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि लालू यादव को इस पूरे मामले में फंसाया गया था। झा ने कहा, इस सरकार ने सभी विरोधियों को चुप कराने के लिए उन्हें गलत तरीके से फंसाने का तरीका अपनाया हुआ है। ये लोग विपक्ष से समझौता करने की कोशिश करते हैं, विफल होने पर इसी तरह से डराते हैं।

फैसले के वक्त खचाखच भरी अदालत में लालू समेत मामले के सभी आरोपी मौजूद थे। कोर्ट द्वारा सजा के ऐलान के बाद सजा पाए लालू यादव और अन्य आरोपियों को जेल जाना पड़ेगा। बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में आए इस फैसले से बिहार समेत देश की राजनीति पर असर पड़ने की संभावना है। इसलिए इस पर पूरे देश की नजर लगी हुई थी।

यह मामला देवघर कोषागार से गलत तरीके से करीब 90 लाख रुपये की अवैध निकासी का है। इस मामले में लालू यादव, जगन्नाथ मिश्र सहित 34 लोगों को आरोपी बनाया गया था। लेकिन ट्रायल के दौरान कई आरोपियों का निधन होने और दो आरोपियों के सरकारी गवाह बन जाने की वजह से इस मामले में अब सिर्फ 22 आरोपी ही बचे थे।

क्या है चारा घोटाला

संयुक्त बिहार का चर्चित चारा घोटाला सरकारी खजाने से 900 करोड़ रुपए को गलत तरीके से निकालने का है। पशुपालन विभाग से जुड़े इस घोटाले में विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों ने राजनीतिक मिली-भगत के साथ अवैध तरीके से अलग अलग कोषागारों से रुपये की निकासी की। जांच के बाद यह घोटाला सामने आया। शुरुआत छोटे-मोटे मामलों के खुलासे से शुरू होते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तक जा पहुंची। मामला बढ़ते-बढ़ते 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा।

1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदग्गा समेत कई जिला कोषागारों से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सरकारी कोषागार और पशुपालन विभाग के कई कर्मचारियों, ठेकेदारों और सप्लायरों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद इस मामले में अलग अलग जिलों में करीब दर्जन भर आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इसके कुछ दिनों बाद घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पशुओं के चारे, दवा आदि की सप्लाई के नाम पर अधिकारियों ने वर्षों तक कोषागारों से करोड़ों रुपए के फर्जी बिल भुनाए।

सीबीआई का कहना है कि उसके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री को न सिर्फ इस मामले की पूरी जानकारी थी बल्कि उन्होंने खुद राज्य के वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में कई बार इन निकासियों की अनुमति दी थी। सीबीआई जांच शुरू होने के बाद चारा घोटाला मामले में बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुईं और छापे पड़े। सीबीआई ने लालू यादव के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया, जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और जेल जाना पड़ा। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेनी पड़ी।

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Published: 23 Dec 2017, 4:02 PM