लॉकडाउन से किसानों पर मार, खेतों में सड़ने लगे टमाटर और अंगूर, आगे और बुरे हो सकते हैं हालात

किसान नेताओं का कहना है कि आगे संकट और बढ़ सकता है, क्योंकि आने वाले दिनों में अंगूर, तरबूज, केला, चना, कॉटन, हल्दी, जीरा, मिर्च, प्याज और आलू की फसलें आने वाली हैं। लेकिन लॉकडाउन में मजदूर मिलने मुश्किल हैं और मिल भी गए तो बेचने की कोई व्यवस्था नहीं है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पूरी दुनिया में कहर बरपा रहे कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश में किए गए 21 दिन के लॉकडाउन से समाज के कई वर्गों पर खासा असर पड़ा है। खासकर मजदूर और किसान वर्ग बड़ी मुसीबत में फंस गया है। एक तरफ मजदूर जहां चौतरफा बंदी से पलायन के लिए मजबूर हैं, लेकिन कहीं जा भी नहीं पा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ किसान अपनी फसल को खेतों में ही सड़ते हुए देखने को मजबूर है।

दरअसल देशव्यापी लॉकडाउन में मंडियों का संचालन बंद होने की वजह से देश भर में बड़े पैमाने पर फल और सब्जी की फसल खेतों में ही सड़ रही है। एक तो बंदी की वजह से मजदूर नहीं पहुंच पा रहे हैं और दूसरे ये कि पूरे देश में ही फसलों की खरीद ठप है। महाराष्ट्र में तो हालात ये है कि टमाटर उगाने वाले किसानों को अभी प्रति किलो का दाम 2 रुपये भी नहीं मिल पा रहा है।

किसान नेताओं का कहना है कि हालात नोटबंदी के दौर से भी खराब होते जा रहे हैं। एक तो जो मिल रहा है उसके भुगतान में देरी हो रही है और दूसरे फसलों के नुकसान की भरपाई की कोई व्यवस्था नहीं है। किसान नेताओं का कहना है कि आगे यह संकट और बढ़ सकता है, क्योंकि आने वाले दिनों में अंगूर, तरबूज, केले, चना, कॉटन, हल्दी, जीरा, मिर्च, प्याज और आलू की फसलें आने वाली हैं। लेकिन लॉकडाउन के कारण मजदूर मिलने मुश्किल हैं और मिल भी गए तो इन्हें बेचने की कोई व्यवस्था नहीं है।

किसान नेताओं का कहना है कि लॉकडाउन के बाद भी बाजार में भारी मंदी की आशंका है, जिससे मांग कम होगी और शायद ही किसानों को फसलों का सही दाम मिल पाए। किसान संगठनों के समूह के मुख्य सलाहकार पी चेंगल रेड्डी का कहना है कि अगर सरकार ने इस समस्या पर समय रहते ध्यान न दिया तो हालात नोटबंदी से भी बुरे हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र कहने को तो कह रहा है कि लोगों को खाने-पीने की चीजें उपलब्ध कराई जाएंगी। लेकिन राज्यों में किसानों को फसलों की कटाई से रोका जा रहा है, फसलों को मंडी नहीं जाने दिया जा रहा और खरीददारों को भी खरीदारी से रोका जा रहा है। फलों और सब्जियों की ढुलाई करने वाले ट्रक ड्राइवर बिना खाने और पैसे के देश भर में जहां-तहां फंसे हुए हैं।

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