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मध्य प्रदेश: शिव ‘राज’ के मंत्री ने आरक्षण पर उठाए सवाल, कहा, ‘योग्य पर अयोग्य’ को दी जाती है तरजीह

मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव

भार्गव ने यह बयान नरसिंहपुर जिले में रविवार को आयोजित विप्र समागम में दिया था। उनके इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने एक लिखित विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया।

भारतीय जनता पार्टी भले ही भरोसा दिलाती रहे कि आरक्षण खत्म नहीं किया जाएगा, लेकिन पार्टी नेताओं के दिल की बात जुबां पर आ ही जाती है। मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने खुले तौर पर आरक्षण पर सवाल उठाए हैं। उनका यह भी मानना है कि ब्राह्मणों में प्रतिभा अधिक होती है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा अधिकारी व कर्मचारी ब्राह्मण जाति से होना चाहिए, ऐसा न होना प्रतिभा का अपमान है। मंत्री ने 'योग्य लोगों पर अयोग्य लोगों' को बैठाए जाने की बात कहते हुए इसे 'अनीति का कार्य' बताया है। उनके इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने एक लिखित विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया।

भार्गव ने यह बयान नरसिंहपुर जिले में रविवार को आयोजित विप्र समागम में दिया था। उन्होंने कहा था, "पहले एक चौथाई अधिकारी व कर्मचारी हमारी (ब्राह्मण) समाज के थे, लेकिन अब 10 प्रतिशत भी नहीं हैं, ऐसा इसलिए हो रहा है कि पहले नीति का कार्य था, अब अनीति का कार्य हो रहा है। योग्यता को दरकिनार कर अयोग्य लोगों का चयन किया जाएगा, 90 प्रतिशत अंक वाले की बजाय 40 प्रतिशत वाले को नियुक्त किया जाएगा, तो देश पिछड़ जाएगा। प्रतिभा का अपमान हो रहा है।"

भार्गव ने आगे कहा, "जब देश आजाद हुआ था, तब एक चौथाई सांसद हमारे समाज के हुआ करते थे, एक चौथाई विधायक और कर्मचारी हमारे समाज के हुआ करते थे, आज 10 प्रतिशत रह गए हैं। हर पार्टी ब्राह्मणों के वोट तो चाहती है, मगर उन्हें देना कुछ नहीं चाहती।

भार्गव ने दूसरी जातियों के संदर्भ में कहा, "लोग कहते हैं कि हम इतनी संख्या में हैं बोलो क्या दोगे, लेकिन ब्राह्मण वर्ग ने कभी इस तरह की ओछी बात नहीं की।"

उनके इस बयान ने जब तूल पकड़ा, तब भार्गव ने नि:संकोच अपनी बात पलट दी। उन्होंने स्पष्टीकरण जारी कर कहा, "मैं संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था का समर्थक हूं। मैंने अपने वक्तव्य में कहीं आरक्षण शब्द का न तो उपयोग किया और न ही उल्लेख।"

प्रदेश की जनता असमंजस में है कि मंत्री के पहले वाले बयान को सच माने या बाद वाले स्पष्टीकरण को।

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