पीएम मोदी के खिलाफ रिपोर्ट देना पड़ा महंगा? चुनाव से ऐन पहले बदले गए महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अश्वनी कुमार का तबादला कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार अश्वनी कुमार की कार्यप्रणाली से खुश नहीं थी। अश्वनी कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के दो मामलों पर केंद्रीय चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी थी।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवीन कुमार

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अश्वनी कुमार का तबादला 11 जुलाई को कर दिया। उनका तबादला ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में विधानसभा के चुनाव दो-तीन महीने के अंदर होने वाले हैं। दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि राज्य की बीजेपी सरकार अश्वनी कुमार की कार्यप्रणाली से खुश नहीं थी। क्योंकि इस साल हुए लोकसभा चुनाव के दौरान अश्वनी कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के दो मामलों पर केंद्रीय चुनाव आयोग को रिपोर्ट भेजी थी।

ये दोनों मामले पहली अप्रैल के चुनाव प्रचार के दौरान लातुर और वर्धा में मोदी के चुनावी भाषण से जुड़े हुए थे। लातुर के भाषण में मोदी ने पहली बार वोट करने वाले मतदाताओं को अपना वोट पुलवामा के शहीदों को समर्पित करने को कहा था। वहीं मोदी ने वर्धा के अपने चुनावी भाषण में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश के अमेठी निर्वाचन क्षेत्र को बदलकर केरल के वायनाड निर्वाचन क्षेत्र चुनने पर उन पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि उन्होंने अल्पसंख्यक बहुल निर्वाचन क्षेत्र को प्राथमिकता दी है।

मोदी के इन दोनों भाषणों के अंश उन दिनों भी काफी चर्चा में थे। इस पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने अश्वनी कुमार से रिपोर्ट तलब की थी। इसके बाद अश्वनी कुमार ने उस्मानाबाद और वर्धा के जिला चुनाव अधिकारियों से रिपोर्ट मंगवाई और उसी के आधार पर केंद्रीय चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी। दो अलग-अलग रिपोर्टों के आधार पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने बहुमत (2-1) के सहारे मोदी को आचार संहिता उल्लंघन मामले में क्लीनचिट दे दी थी। इस फैसले पर चौंकाने वाली बात यह थी कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने शिकायत की थी और उन्होंने कहा था कि इन फैसलों में उनकी असहमतियों को दर्ज नहीं किया गया।

इधर अश्वनी कुमार की जगह राज्य के नए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के रूप में बलदेव हरपाल सिंह को लाया गया है। वह 1989 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। जबकि अश्वनी कुमार 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और उन्हें 16 अगस्त 2016 को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। उनका तीन साल का कार्यकाल एक महीने बाद पूरा होने वाला था और अक्तूबर तक राज्य में विधानसभा के चुनाव भी होने वाले हैं। लेकिन उससे पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अश्वनी कुमार की जगह दूसरे आईएएस अधिकारी को लाने के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग के पास तीन आईएएस अधिकारियों के नामों की सूची भेजी थी जिसमें बलदेव हरपाल सिंह का भी नाम शामिल था। ऐसी चर्चा है कि वह फडणवीस की पसंद के आईएएस अधिकारी हैं। बलदेव हरपाल सिंह 2017 से सांताक्रूज़ इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन, एसईजेड मुंबई के विकास आयुक्त के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे। वह महाराष्ट्र में श्रम विभाग के मुख्य सचिव पद पर भी रह चुके हैं। अब उनको राज्य सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी है और वह है राज्य में 288 सीटों के लिए विधानसभा के चुनाव संपन्न कराना।

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