कर्ज वसूली पर पीएम मोदी के दावे पर माल्या ने ली चुटकी, पूछा- कौन बोल रहा है झूठ!

देश से फरार विजय माल्या ने ट्वीट कर पीएम मोदी पर निशाना साधा है। माल्या ने तंज कसते हुए कहा कि पीएम मोदी ने दावा किया है कि उनकी सरकार ने कर्ज दी गई राशि से ज्यादा वसूल लिया है, लेकिन लंदन कोर्ट में भारतीय बैंकों का दावा अलग है। ऐसे में कौन झूठ बोल रहा है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए सीधे पीएम मोदी पर तंज कसा है। माल्या ने गुरुवार की सुबह ट्वीट कर आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू दावा किया कि उनकी सरकार ने कर्ज दी गई राशि से ज्यादा वसूल कर लिया है, जबकि ब्रिटेन की कोर्ट में भारतीय बैंकों ने कुछ अलग ही दावे किए। तो ऐसे में कौन झूठ बोल रहा है। इससे पहले मंगलवार को विजय माल्या ने एक बार फिर ट्वीट कर कहा था कि वह बैंकों का पूरा पैसा चुकाने का एक बार फिर प्रस्ताव दे रहे हैं।

हाल ही में जेट एयरवेज के संकट के बहाने मोदी सरकार पर तंज कसने वाले भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने गुरुवार को अपने ट्वीट में कहा, “भारत के प्रधानमंत्री ने हाल में एक इंटरव्यू में कहा कि मैंनेसरकारी और निजी बैंकों से जितनी राशि कर्ज ली है, उनकी सरकार ने उससे कहीं ज्यादा वसूल कर लिया है। लेकिन भारतीय बैंकों का कोर्ट में दावा अलग है। ऐसे में किस पर यकीन किया जाए। कोई एक तो झूठ बोल रहा है!”

इससे पहले मंगलवार को माल्या ने ट्वीट कर एक बार फिर बैंकों का पूरा पैसा चुकाने का प्रस्ताव दिया था। माल्या ने कहा था, “मैं किसी तरह से भी कर्ज चुकाने को तैयार हूं, चाहे मैं लंदन में रहूं या भारत की जेल में।” इसके साथ ही माल्या ने कहा कि उन्होंने किंगफिशर में काफी निवेश किया था, जिसकी वजह से वह भारत की सबसे बड़ी और सबसे अधिक पुरस्कारों से सम्मानित होने वाली एयरलाइंस बन गई। इसके लिए सरकारी बैंकों से कर्ज लिया गया, लेकिन इसके बदले मुझे अपराधी घोषित कर दिया गया। मैं पूरा कर्ज चुकाने का प्रस्ताव दे चुका हूं।

जेट एयरवेज के संकट को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए माल्या ने कहा था कि सरकार ने एयर इंडिया को बचाने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन का उपयोग किया। सिर्फ पीएसयू होना भेदभाव करने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए। इससे पहले माल्या ने कहा था कि भले कभी जेट और किंगफिशर एयरलाइंस एक दूसरे के प्रतिद्वंदी रहे हों, लेकिन एक बड़ी निजी एयरलाइन को असफलता के कगार पर देखकर तकलीफ होती है।

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