मिलिए भारत जोड़ो यात्रा के सफलता के पीछे के उन नायकों से जो पर्दे के पीछे रहकर हर जिम्मेदारियों का कर रहे निर्वाहन

दरअसल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने अपने ट्वविटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने में लगे कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी के बारे में बात कर रहे हैं।

फोटो: स्क्रीन ग्रैब
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रवि प्रकाश

7 सितंबर को शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा चार राज्यों से गुजर चुकी है। राहुल गांधी के नेतृत्व में शुरू हुई ये यात्रा तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश होते हुए अब तेलंगाना पहुंच गई है। भारत जोड़ो यात्रा को भारी सफलता मिल रही है। जिस रास्ते से भी यात्रा गुजर रही है वहां भारी संख्या में लोग नजर आ रहे हैं। लोगों में यात्रा में शामिल होने को लेकर भारी जोश है। मानों वो इस यात्रा में शामिल हो इतिहास का हिस्सा बनने जा रहे हों। वैसे भारत जोड़ो यात्रा की सफलता को देख यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि यह यात्रा आने वाले दिनों में इतिहास के पन्नों में जगह जरूर बनाएगी। यह अहसास इस यात्रा को सफल बनाने में लगे उन लोगों को भी है जो इसका पूरा मैनेजमेंट संभाल रहे हैं।

फोटो: स्क्रीन ग्रैब
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दरअसल यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने अपने ट्वविटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने में लगे कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी के बारे में बात कर रहे हैं। श्रीनिवास ने ट्वीट कर लिखा, "भारत जोड़ो यात्रा के सफलता के पीछे के ये वो नायक हैं जो पर्दे के पीछे रहकर हर जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इन सभी को हमारा सलाम।

इस वीडियो में यात्रा में शामिल लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो उसका जिम्मा संभाल रहे रोहित, प्रविण और मंदीप अपनी जिम्मेदारियों को बारे में बात करते दिख रहे हैं। रोहित भारत जोड़ो यात्रा का सारा इंफ्रास्ट्रक्चर देखते हैं। यात्रियों को रहने के लिए शेड तैयार करने से लेकर बेड तक इनके जिम्मे है। प्रवीण लाइटिंग का काम देखते हैं। जबकि मंदीप के जिम्मे पिंक जोन है। पिंक जोन खास महिला यात्रियों के लिए बनाया गया है। उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो इस जिम्मेदारी मंदीप की है।

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रोहित बताते हैं कि उन्हें हर रोज सुबह 3.30 बजे जागना होता है। फिर जब सुबह 6 बजे के करीब यात्री निकलते हैं, फिर उनका काम शुरू होता है। वो अपने साथियों के साथ मिलकर वहां लगे अस्थाई शेड को डिस्मेंटल करते हैं और अगले पड़ाव के लिए निकल पड़ते हैं। यात्रियों के पहुंचने से पहले ही इन्हें फिर एक गांव बसाना पड़ता है। वहीं प्रवीण ने बताया कि उनके पास करीब 1 लाख स्क्वायर फीट का एरिया होता है, जिनकी लाइटिंग ये अपनी टीम के साथ मिलकर करते हैं।

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मंदीप का कहना है कि यात्रा के दौरान सबसे बड़ी परेशानी है वो है महिलाओं के लिए वाशरूम का। मंदीप बताते हैं कि महिलाओं की सुरक्षा से लेकर उनके हर परेशानी का निवाण उनके जिम्मे है। इनका कहना है, जो सही भी है कि वो लोग हर दिन यात्रियों के लिए एक नया गांव बसाते हैं।

मिलिए भारत जोड़ो यात्रा के सफलता के पीछे के उन नायकों से जो पर्दे के पीछे रहकर हर जिम्मेदारियों का कर रहे निर्वाहन

यात्रियों के साथ रहते हुए इन्हें दो महीने से ज्यादा वक्त गुजर चुका है। इनके लिए यात्रा में शामिल लोग अब एक परिवार की तरह हो गए हैं। जिस तरह से इनके साथ व्यवहार किया जाता है, इन्हें बहुत अच्छा लगता है। इनका कहना है कि यात्रा में शामिल महिलाएं इस तरह बर्ताव करती हैं जैसे उनके सगे छोटे भाई हों। सारे लोग एक साथ त्योहार मनाते हैं। किसी का जन्मदिन आए तो भी सब इकट्ठे खुशियां बांटते हैं। इनका कहना है कि ऐसा लगता ही नहीं कि ये यहां काम कर रहे हैं। ये सभी अपने काम को बहुत ज्यादा आनंद के साथ करते हैं।

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इन्हें हर रोज मेहनत करने की शक्ति जनता के प्यार, लोगों की हिम्मत और राहुल गांधी के ताकत से मिलती है। इनका कहना है कि राहुल गांधी जिस तरह से सब लोगों को साथ लेकर हर दिन 30-30 किमी चलते हैं वो अद्भुत है। मंदीप बताते हैं कि यात्रा से हम यह पता लगा है कि हिम्मत दिखाओ तो सब कुछ होगा। इनका मानना है कि भारत जोड़ो यात्रा दांडी यात्रा के बाद सबसे बड़ी यात्रा है। मंदीप पूरे विश्वास से कहते हैं कि यात्रा से बदलाव जरूर होगा, 100 प्रतिशत होगा। उनका कहना है कि इस रैली का हिस्सा बनकर वह गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। और भविष्य में यह कह सकते हैं कि हम उस रैली का हिस्सा रहे हैं जिसने भारत को बदला है।    

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