'चुनाव आयोग पर मोदी का कब्जा, ज्ञानेश कुमार उनके हाथ की कठपुतली', विपक्ष ने CEC का इस्तीफा मांगा
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने फैसले लेने में मनमानी करने और उनकी आपत्तियों की अनदेखी करने का आरोप लगा है।

कांग्रेस का आरोप- मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं।
मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
तेजस्वी यादव ने कहा कि, ज्ञानेश कुमार लोकतंत्र और संविधान ख़त्म करने पर आमादा हैं।
विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने के आरोप लगाते रहे हैं। खास कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कई आरोप लगाए। इसी बीच चुनाव आयोग द्वारा देश भर में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) अभियान को लेकर नया विवाद सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने फैसले लेने में मनमानी करने और उनकी आपत्तियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस खुलासे पर कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी समते कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है।
रिपोर्ट में क्या
इंडियान एक्सप्रेस कि एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ.विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 बार अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के समक्ष दर्ज कराई थीं। ये आपत्तियां विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर, नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 में बदलाव, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और जोड़ने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील तथा वोटर डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं।
बता दें कि, एसआईआर की प्रक्रिया जून 2025 से बिहार से शुरू हुई थी। इसके बाद यह और राज्यों में जारी है। छपी रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने औपचारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई। दस महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं, इसमें एक बार तो एक दिन में ही चार बार सवाल उठाया गया। चुनाव आयुक्तों का कहना है कि जो फैसले लिए जा रहे हैं और आदेश दिए जा रहे हैं, उसमें उन्हें संज्ञान में नहीं लिया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई। इस फॉर्म में एसआईआर से जुड़ा एक सवाल जोड़ा गया था, जिसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था या नहीं।
ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली
इस खुलासे पर कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार पर ताजा हमला बोला है। कांग्रेस ने रिपोर्ट के साथ एक्स पर अपने पोस्ट में कहा कि मोदी के चहेते ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग में अपनी मनमर्जी चला रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश अपने बॉस मोदी की तरह तानाशाही कर रहे हैं और मोदी को खुश करने के लिए 'वोट चोरी' का काम कर रहे हैं।
कांग्रेस ने आगे कहा, "हम पहले भी कहते आए हैं - मोदी ने चुनाव आयोग पर कब्जा कर रखा है। ज्ञानेश कुमार मोदी के हाथ की कठपुतली है। इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट से ये बात साबित होती है।" मुख्य विपक्षी दल ने कहा कि मोदी और ज्ञानेश ने मिलकर देश के लोकतंत्र को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
पार्टी ने कहा कि, "वक्त आने पर सबका हिसाब होगा, जवाबदेही तय होगी। इस अपराध की सजा जरूर मिलेगी।"
'लोकतंत्र और संविधान ख़त्म करने पर आमादा ज्ञानेश कुमार'
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी इस रिपोर्ट को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, "27 जून 2025 को बिहार चुनाव से चंद दिन पहले एकपक्षीय दोषपूर्ण SIR शुरू करने पर हमने सर्वप्रथम देश को आगाह किया था। हमने 15 से अधिक बार तार्किक रूप से तथ्यों और सबूतों के साथ दोषपूर्ण और द्वेषपूर्ण SIR प्रक्रिया पर प्रेजेंटेशन देकर जनता और मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखा था।"
तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते हुए कहा कि, "दो शीर्ष लोगों के अनैतिक, अवैधानिक कुकृत्यों और निर्देशों की पालना कर लोकतंत्र और संविधान ख़त्म करने पर आमादा ज्ञानेश कुमार को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें विश्वास दिलाया गया है उन्हें बचा लिया जाएगा।"
'ज्ञानेश कुमार को हटान के लिए राज्यसभा में मोशन लिया जाए'
राज्यसभा में टीएमसी पार्लियामेंट्री लीडर, डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि , "पाँच महीने पहले, 60 से ज़्यादा राज्यसभा मेंबर्स ने राज्यसभा के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार को हटाने का मोशन दिया था। यह पांच महीने पहले की बात है।" उन्होंने आगे कहा कि, "अब आज, इस बड़ी न्यूज़ ब्रेक के बाद कि दो इलेक्शन कमिश्नर्स ने मुख्य चुनाव आयोग के कई कामों पर एतराज़ जताया है, अब समय आ गया है कि मुख्य चुनाव आयोग पर इंपीच करने के लिए राज्यसभा में मोशन लाया जाए और डेमोक्रेसी को बचाया जाए।"
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
