निर्भया केस: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की मुकेश और विनय की क्यूरेटिव पिटीशन, फांसी की तैयारी शुरू

विनय और मुकेश ने अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई थी। दोषियों की याचिका खारिज होने पर निर्भया की मां ने खुशी जाहिर की है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

दिल्ली के निर्भया रेप केस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद दोषी विनय और मुकेश की क्यूरेटिव याचिका खारिज कर दी है। दोनों दोषियों को फांसी होना अब लगभग तय है। जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन, जस्टिस आर. भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की पांच जजों वाली पीठ ने दोनों दोषियों की याचिका खारिज कर दी है।

दोषियों की याचिका खारिज होने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “मेरे लिए यह बहुत बड़ा दिन है। मैं पिछले 7 सालों से संघर्ष कर रही हूं। लेकिन मेरे लिए इससे भी बड़ा दिन 22 जनवरी होगा जब उन्हें (दोषियों को) फांसी दी जाएगी।”

बता दें कि इस केस के चारों दोषियों को निचली अदालत ने 9 जनवरी को डेथ वॉरंट जरी करते हुए 22 जनवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था। इसके बाद विनय और मुकेश ने अपने कानूनी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए क्यूरेटिव याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की गई थी। विनय शर्मा के वकील ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट सहित सभी अदालतों ने मीडिया और नेताओं के दबाव में आकर उन्हें दोषी ठहराया है। गरीब होने के कारण उसे मौत की सजा सुनाई गई है।

बता दें कि 6 दिसंबर 2012 को इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले निर्भया गैंगरेप मामले के चार दोषियों- अक्षय, पवन, विनय और मुकेश को निचली अदालत से मिली फांसी की सजा को सभी उच्च न्यायालयों से बरकरार रखा गया है। चारों दोषियों की फांसी की सजा में देरी पर पीड़िता के परिवार ने पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें चारों दोषियों को फांसी देने की मांग की गई थी। इस याचिका पर कोर्ट ने 9 जनवरी को सभी चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वॉरंट जारी किया था। चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फांसी दी जानी है।

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