पटना से निकलते ही ट्रंप बन गए नीतीश कुमार! गरीबी छुपाने के लिए पर्दे से ढक दी गई झुग्गी बस्तियां

नीतीश जहां निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, वहां सड़क किनारे झुग्गी बस्तियां हैं। यह सरकारी तामझाम के प्रदर्शन में बाधा पहुंचाने वाली थीं। तो उनके आगे लगभग 500 मीटर तक कनात खींच दिए गए- बांस के छोटे-छोटे पोल बनाकर यहां से वहां तक सफेद कपड़े डाल दिए गए।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब फरवरी में अहमदाबाद का दौरा किया था, तब गुजरात की बीजेपी सरकार ने झुग्गी बस्तियों के आगे दीवारें खड़ी करवा दी थीं ताकि विदेशी अतिथि को देश की गरीबी न दिखे। लगता है, बिहार की राजनीतिक सत्ता में बीजेपी की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) पार्टी को यह तरीका बहुत पसंद आया है- न बुरी स्थितियों से रू-ब-रू होओ, न उस बारे में बात करो। आखिर, अब विधानसभा चुनाव के कितने दिन बचे ही हैं!

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 24 जून को मधुबनी के जयनगर शहर गए थे। बरसात और इसके साथ ही बाढ़ सिर पर है। नेपाल के हाल के कदमों ने बाढ़ को लेकर चिंताएं वैसे ही बढ़ा रखी हैं। ऐसे में कुछ घोषणाएं जरूरी हैं। सो, नीतीश ने कमला नदी पर जयनगर में बराज बनाने की घोषणा की। उन्होंने कमला बियर प्वाइंट को बराज में परिवर्तित करने का प्रस्ताव देने का निर्देश अधिकारियों को दिया और कहा कि बराज में परिवर्तित होने से सिंचाई क्षमता में भारी वृद्धि होगी।

नीतीश जहां निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, वहां सड़क किनारे झुग्गी बस्तियां हैं। यह सरकारी तामझाम के प्रदर्शन में बाधा पहुंचाने वाली थीं। तो उनके आगे लगभग 500 मीटर तक कनात खींच दिए गए- बांस के छोटे-छोटे पोल बनाकर यहां से वहां तक सफेद कपड़े डाल दिए गए। कनात को बिहार के कुछ इलाकों में पर्दे भी कहते हैं। शादी-ब्याह या अन्य आयोजनों पर इसका उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि रौनक बनी रहे, एक चैहद्दी-जैसा खिंच जाए और अनवांछित लोग उसमें प्रवेश नहीं करें। पुलिस वाले झुग्गी-झोपड़ी की तरफ तो तैनात थे ही, मुख्यमंत्री के काफिले के साथ भी इस बात पर निगाह रख रहे थे कि कोई इधर से उधर न झांके।

अधिकारी कह रहे हैं कि यह पर्दे मुख्यमंत्री और अन्य अतिथियों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए लगाया गया था। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब इसलिए किया गया ताकि गरीब जनता को नीतीश की आंखों से दूर ही रखा जाए। वैसे भी, जैसा कि साथ के चित्र से स्पष्ट है, निरीक्षण के दौरान सोशल डिस्टेन्सिंग का खयाल कतई नहीं रखा गया। अधिकांश कार्यकर्ताओं ने मास्क तक नहीं लगा रखे थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी गले में गमछा डाल रखा था और जब-तब वे अपना नाक-मुंह उससे ढक ले रहे थे।

जयनगर के एक दुकानदार सोनू ने कहा कि यह परदा रातोंरात लगा दिया गया। एक अन्य दुकानदार ने कहा कि इस सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे थे। इन्हें रातोंरात भर दिया गया ताकि मुख्यमंत्री और उनके काफिले को दिक्कत न हो। यह सब इसलिए किया गया ताकि लोग कोई सवाल न करें जबकि उनके पास पूछने को बहुत कुछ है। आखिर, कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने सबको वैसे ही छोड़ दिया है। आम लोगों की दिक्कतों के बारे में जानने-पूछने वाला कोई नहीं है।

Published: 25 Jun 2020, 3:00 PM
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