नहीं हो सका नए सीबीआई प्रमुख के नाम पर फैसला, चयन समिति बैठक में खड़गे ने मांगी शॉर्टलिस्ट अधिकरियों की डिटेल

नए सीबीआई प्रमुख का नाम तय करने के लिए गुरुवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक बेनतीजा रही है। खबरों के अनुसार बैठक में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शॉर्ट लिस्ट किए गए अधिकरियों की डिटेल देने की मांग की है। समिति की एक और बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सीबीआई को नया प्रमुख मिलने में अभी और समय लगेगा। सीबीआई निदेशक के नाम पर फसैला लेने के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई चयन समिति की बैठक बगैर अंतिम फैसला लिए खत्म हो गई। खबरों के अनुसार इस बैठक में किसी नाम पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। इसलिए सीबीआई निदेशक के चयन के लिए समिति की एक और बैठक जल्द बुलाई जाएगी।

अगले सीबीआई प्रमुख के नाम का फैसला करने के लिए गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हिस्सा लिया। लेकिन काफी देर चली यह बैठक बेनतीजा रही।

इससे पहले गुरुवार को दिन में सीबीआई प्रमुख का नाम तय करने वाली समिति के सदस्य और लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जन खड़गे ने आरोप लगाया था कि सरकार की ओर से उन्हें अभी तक शार्ट लिस्ट किए गए अफसरों की डिटेल नहीं दी गई है। खड़गे ने कहा था कि उन्हें अभी तक शार्टलिस्टेड कैंडिडेट की सूची नहीं मिली है। जो लिस्ट मिली है उसमें 90 नाम हैं और सिर्फ उनके रिटायरमेंट और इम्पैनलमेंट की जानकारी है। इसमें उनका अनुभव, विशेष मामलों की जांच आदि का जिक्र तक नहीं है। इसके बाद सवाल उठने लगे थे कि क्या समिति के दूसरे सदस्य और देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई को शार्ट लिस्टेड कैंडिडेट्स की सूची मिली है या नहीं?

खड़गे लगातार इस सूची की मांग करते रहे हैं। इसके एवज सरकार ने उन्हें जो सूची सौंपी है उसमें 1983, 1984 और 1985 बैच के करीब 90 आईपीएस अफसरों के नाम हैं। इतना ही नहीं बता दें कि पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने खड़गे के विरोध के बावजूद 10 जनवरी को आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया था। उसके बाद से यह पद खाली पड़ा है। केंद्र ने एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया था।

इससे पहले सीबीआई के नंबर दो के अधिकारी राकेश अस्थाना के साथ वर्मा के विवाद सार्वजनिक होने के बाद केंद्र सरकार ने बीते साल अक्टूबर में दोनों अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था। सरकार के इस फसैले को वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जनवरी के पहले सप्ताह में सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को राहत देते हुए उन्हें सीबीआई निदेशक केपद पर बहाल करने का आदेश दिया था। लेकिन पदभार ग्रहण करने के दूसरे ही दिन मोदी सरकार ने आनन-फानन में चयन समिति की बैठक बुलाकर वर्मा को हटाने के फैसला ले लिया।

वर्मा ने खुद को हटाए जाने के तौर तरीकों पर सवाल उठाते हुए नौकरी से इस्तीफा दे दिया था। वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद अग्निशमन सेवा, नागरिक रक्षा और होम गार्ड्स का महानिदेशक बनाया गया था। वर्मा ने उस पेशकश को स्वीकार नहीं किया और उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें सेवानिवृत्त मान लिया जाना चाहिए क्योंकि उनकी 60 साल की आयु पूरी हो चुकी है। उन्होंने एक फरवरी 2017 को सीबीआई निदेशक का पदभार संभाला था। सीबीआई प्रमुख के तौर पर उनका कार्यकाल दो साल का था।

वर्मा के इस्तीफे से राजनीतिक भूचाल आ गया था, जिसमें विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सार्वजनिक संस्थानों में कथित रूप से हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। खड़गे ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राव की सीबीआई के अंतरिम प्रमुख के रूप में नियुक्ति को ‘‘गैर कानूनी ’’ बताया था। उन्होंने नए सीबीआई प्रमुख का चयन करने के लिए सरकार से तत्काल समिति की बैठक बुलाने को कहा था।

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