अखिलेश ने दिखाया जया बच्चन को ठेंगा, ममता की शरण में मायके पहुंचीं

समाजवादी पार्टी नेताओं का मानना है कि जया बच्चन ने राज्यसभा सांसद रहते हुए न तो कभी आम लोगों और न ही समाजवादी पार्टी के लिए कुछ योगदान दिया। बीजेपी को लेकर भी उनका रवैया पार्टी लाइन से अलग ही रहा है।

फाइल फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

फिल्म अभिनेत्री और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन के लिए इस बार राज्यसभा की सदस्यता अपनी पार्टी समाजवादी पार्टी से मिलना मुश्किल है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लगभग तय कर लिया है कि इस बार जया बच्चन को राज्यसभा नहीं भेजा जाएगा। इसे भांपते हुए जया बच्चन ने तृणमूल कांग्रेस नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से नजदीकियां बढ़ा ली हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमिताभ बच्चन के परिवार के राजनीतिक रुख से भी अखिलेश यादव नाराज हैं। खुद अमिताभ बच्चन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकियां हैं और गुजरात के लिए वे कई बार पर्यटन को बढ़ावा देने वाले विज्ञापन कर चुके हैं। लेकिन उनकी पत्नी जया बच्चन समाजवादी पार्टी से सांसद हैं।

समाजवादी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस बात से भी नाराज है कि जया बच्चन ने सांसद रहते हुए न तो आम लोगों के लिए कोई काम किया और न ही पार्टी के लिए। उन्होंने बीजेपी को लेकर हमेशा अपना रुख नर्म रखा और पार्टी को उनसे जो उम्मीदें थीं, वह उसे पूरा नहीं कर सकीं।

ये सारी बातें जया बच्चन भांप चुकी हैं कि अब उनको समाजवादी पार्टी से राज्यसभा टिकट नहीं मिलेगा। इसलिए अब वे पश्चिम बंगाली की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से नजदीकियां बढ़ा रही हैं। राज्यसभा में जया बच्चन का कार्यकाल 3 अप्रैल, 2018 को खत्म हो रहा है। समाजवादी पार्टी की सांसद होने के बावजूद 2005 में उन्हें उस वक्त सदस्यता छोड़ना पड़ी थी, जब उन पर लाभ के पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगा था। उन पर आरोप था कि सांसद होने के साथ ही वे उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद की अध्यक्ष भी थीं। लिहाजा उन्हें अपनी सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा था।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के मुताबिक जया बच्चन पार्टी के टिकट की रेस में शामिल हैं। लेकिन इस पर आखिरी फैसला पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को करना है। जया बच्चन के नाम का ऐलान ममता की मंजूरी के बाद ही होगा।

इस साल अप्रैल में राज्यसभा के 58 सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इसमें उत्तर प्रदेश से 10 सीटें खाली होंगी। इन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों का चुना जाना तय माना जा रहा है। पिछले साल हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को राज्य की कुल 403 सीटों में से 312 सीटें मिली थीं। इसके बाद समाजवादी पार्टी के पास राज्यसभा में सिर्फ एक उम्मीदवार भेजने का ही विकल्प है। ऐसे में जया बच्चन को टिकट मिलना करीब-करीब असंभव है।

सूत्रों का कहना है कि पिछले साल हुए उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद से ही जया बच्चन ने ममता बनर्जी से अपने संबंध बढ़ाने शुरु कर दिए थे। इस बारे में तृणमूल कांग्रेस के एक और नेता का कहना है कि तृणमूल के चार सांसदों की सीटें खाली होने वाली हैं, इसके लिए बहुत से उम्मीदवार पहले से रेस में हैं और इस बार कम से कम दो नए चेहरे राज्यसभा में भेजे जा सकते हैं। ऐसे में जया बच्चन के लिए संभावना हो सकती है।

तृणमूल नेता का कहना है कि जया बच्चन पश्चिम बंगाल में बहुत लोकप्रिय हैं और बंगाली होने के कारण उनकी दावेदारी में दम है। उनके पति अमिताभ बच्चन भी गाहे-बगाहे खुद को बंगाल का दामाद कहते रहे हैं और अक्सर कहते रहे हैं कि उनके करियर को इस मुकाम तक पहुंचाने में बंगाल की बहुत बड़ी भूमिका है।

पिछले साल जब बीजेपी युवा मोर्चा ने ममता बनर्जी के सिर पर 11 लाख के इनाम की घोषणा की थी, तो जया बच्चन ने ही इसका जवाब देते हुए बचाव किया था। इसके अलावा अमिताभ बच्चन और जया बच्चन नियमित रूप से बंगाल में होने वाले फिल्म महोत्सवों में हिस्सा लेते रहे हैं। बंगाल फिल्म महोत्सव में अमिताभ बच्चन लगातार चौथी बार मुख्य अतिथि बनाए गए थे। इससे स्पष्ट है कि जया बच्चन और ममता बनर्जी के बीच काफी मधुर संबंध हैं।

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