‘गुजरात की बिजली कंपनियों ने डुबोया बैंकों का हजारों करोड़, आरबीआई ने की सख्ती तो बचाव में उतरी मोदी सरकार’

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि 2005 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने केजी बेसिन में मिले तेल भंडार का नाम दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखने की घोषणा की थी। और उन्हीं दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर 20,000 करोड़ का घोटाला किया गया।

फोटोः स्क्रीनशॉट
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने पीएम मोदी और उनकी सरकार पर गुजरात की सरकारी कंपनी गुजरात स्टेट पॉवर कॉर्पोरेशन (जीएसपीसी) के घोटाले को छिपाने के लिए आरबीआई की साख को गिराने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नोटबंदी के बाद आरबीआई पर ये दूसरी बड़ी चोट की गई है, जो उसका एक तरह से अंतिम संस्कार करने के समान है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में आरोप लगाया कि गुजरात की सरकारी कंपनी जीएसपीसी को दिवालिया घोषित होने से बचाने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने आरबीआई के सर्कूलर का विरोध किया है और उसे पलटने के लिए कहा है। यही नहीं, जयराम रमेश ने बताया कि जीएसपीसी के कर्ज को कम करने के लिए मोदी सरकार ने भारतीय नवरत्न कंपनियों में से एक ओएनजीसी को भी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी बोर्ड की असहमित के बावजूद पीएम मोदी और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के दबाव के कारण ओएनजीसी को 8000 करोड़ में जीएसपीसी से गैस भंडार खरीदना पड़ा।

रमेश ने बताया कि बैंकों से कर्ज धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए आरबीआई ने 12 फरवरी 2018 को एक सर्कूलर जारी कर कहा था कि 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज ली हुई कंपनियां, अगर 1 मार्च 2018 तक कर्ज का भुगतान नहीं करती हैं, तो इसके 180 दिनों के अंदर बैंक उन्हें दिवाला कानून के तहत दिवालिया घोषित कर दें। इस सर्कूलर के आधार पर जीएसपीएस का 180 दिन 27 अगस्त को पूरा हो गया और अभी भी उसके ऊपर विभिन्न बैंकों का साढ़े 12,000 करोड़ रुपये बकाया है। आरबीआई के इसी सर्कूलर के खिलाफ जीएसपीसी से ठेका लेने वाली निजी कंपनियों ने अडाणी पॉवर के नेतृत्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसी याचिका पर अपना पक्ष रखते हुए बीते 2 अगस्त को केंद्र सरकार ने अदालत से कहा कि वह आरबीआई के सर्कूलर से सहमत नहीं है और इसमें दिए गए 180 दिन की समयसीमा को बढ़ाकर 360 दिन किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि जून 2005 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए केजी बेसिन में मिले तेल भंडार का नाम दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रखने की घोषणा की थी। और उन्हीं दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर 20000 करोड़ का घोटाला किया गया। जयराम रमेश ने कहा कि इस घोटाले का खुलासा जीएसपीसी पर गुजरात विधानसभा में पेश सीएजी की रिपोर्ट से हुआ है। सीएजी ने 31 मार्च 2015 को गुजरात विधानसभा में जीएसपीस पर एक रिपोर्ट पेश की थी। दूसरी रिपोर्ट 31 मार्च 2016 को पेश की गयी। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक जीएसपीसी ने 15 बैंको से 20000 करोड़ रु कर्ज लिया। जिनमें सबसे ज्यादा कर्ज भारतीय स्टेट बैंक से लिया गया। उसके बाद गैस निकालने का ठेका पसंदीदा कंपनियो को दिया गया। जिनमें ऐसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें पहले इस काम का कोई अनुभव नहीं था। लेकिन इतने पैसे खर्च करने के बाद भी गैस नहीं निकला और बैंकों का कर्ज भी नहीं लौटाया गया। इन कंपनियों में अडानी पावर और बारबाडोस की एक कंपनी भी शामिल है।

रमेश ने कहा कि यह अभूतपूर्व और अद्भुत घटना है। यह 70 सालों में पहला मौका है जब आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच किसी मुद्दे पर इतनी असहमति हो कि केंद्र सरकार खुलकर उसके सर्कूलर के खिलाफ कोर्ट में गई हो। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कारण किसी तरह जीएसपीसी को बचाना है। क्योंकि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साख पर एक बड़ा कलंक है। और पीएम मोदी को इस कलंक से बचाने के लिए केंद्र सरकार आरबीआई को लगातार नीचा दिखा रही है। रमेश ने कहा कि नोटबंदी में आरबीआई को गहरी चोट पहुंचायी गयी और उसके बाद ये दूसरा मौका है जब आरबीआई के कान काटे जा रहे हैं।

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