किसान न्याय रैली में मोदी-योगी सरकार पर जमकर बरसीं प्रियंका, बोलीं- जब तक गृह राज्यमंत्री का इस्तीफा नहीं होता, हम लड़ते रहेंगे

वाराणसी में आयोजित किसान न्याय रैली में दुर्गा मंत्रों के साथ भाषण की शुरुआत करते हुए प्रियंका गांधी ने लखीमपुर घटना, कृषि कानून, महंगाई समेत कई अन्य मुद्दों पर सरकार के खिलाफ करीब आधे घंटे के भाषण में हुंकार भरी।

फोटो: नवजीवन
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नवजीवन डेस्क

वाराणसी में आयोजित किसान न्याय रैली में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी केंद्र और प्रदेश की बीजेपी सरकार पर जमकर बरसीं। दुर्गा मंत्रों के साथ भाषण की शुरुआत करते हुए प्रियंका ने लखीमपुर घटना, कृषि कानून, महंगाई समेत कई अन्य मुद्दों पर सरकार के खिलाफ करीब आधे घंटे के भाषण में हुंकार भरी। जगतपुर इंटर कॉलेज मैदान किसा न्याय रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा, “जो सच्चाई मैं उत्तर प्रदेश में पिछले दो सालों देखी है। जबसे मैं यहां पर काम कर रही हूं, वह सच्चाई मैं आपके सामने रखना चाहती हूं। शुरू, शुरू में जब मैंने यहां काम करना शुरू किया तो एक घटना हुई। यहां से कुछ ही दूर सोनभद्र में, इस घटना में 13 आदिवासी खेत में काम कर रहे थे, पुलिस प्रशासन की सहसमति से, कुछ लोगों उनकी जमीन लेने की कोशिश कर रहे थे। वो लोग ट्रैक्टर और जीप लेकर आए, मारपीट की, गोली चलाई। 13 आदिसवासियों शहीद किया। सोनभद्र में नरंहार हुआ। जब मैं उनसे मिलने गई। तो मेरे मन में एक बात बहुत स्पस्ट लगी। जिस परिवार के पास मैं जा रही थी, वे कह रहे थे कि हमे मुआवजा नहीं चाहिए, हमें पैसा नहीं चाहिए किसी सरकार का। हमें न्याय चाहिए। लेकिन दीदी हमें न्याय की उम्मीद नहीं है।"

कांग्रेस महासचिव ने कहा, “सनभद्र में एक पीड़ित ने कहा कि उनको उनके घर के बाहर निकाल कर पीटा गया था। उनके बच्चों को धमकाया गया था। अगले परिवार से मिलने गई तो मुझे बताया गया कि उनके तमाम भाई बहन सेना में, देश की रक्षा करते हैं। जब मैं रमन कश्यप के घर गई तो मुझे बताया गया कि उनको काम करते करते मारा गया। उनको जीप के नीचे कुचला गया। क्योंकि वह वीडियो ले रहे थे, सच्चाई दिखाना चाह रहे थे। सारे परिवारों ने यही कहा कि हमें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। अगर हमारे देश में कोई कुचला जाता है। किसी के प्रति हिंसा होती है, किसी पर अत्याचार होता है और उसको न्याय मिलने की उम्मीद नहीं होती तो वह किसके पास जाएगा। अगर सरकार, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, गृह राज्यमंत्री, विधायक, सभी मिले हुए हैं, सभी अपनी पीठ मोड़ देते हैं उनकी तरफ तो वह किसके पास जाएं? और क्या करें?”


प्रियंका गांधी ने कहा, “आप जानते हैं कि किसानों ने 9-10 महीनों से एक आंदोलन जारी रखा है। 300 दिन से अधिक यह आंदोलन चला है। इसमें 600 से ज्यादा किसान शहीद हुए हैं। क्यों कर रहे हैं ये आंदोलन? ये आंदोलन इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि ये जानते हैं कि सरकार के जो तीन कानून हैं, उनके जरिए उनकी आमदनी, उनके खेत, उनके फसल सब इस सरकार के खरबपति मित्र के पास जाने वाली है, उनके कब्जे में होने वाली है। मोदी के अरबपति मित्रों ने पिछले साल हिमाचल से सेब 88 रुपये किलो में खरीदा था।”

उन्होंने कहा, “पिछले हफ्ते से हम देख रहे हैं। इस देश के गृह राज्यमंत्री के बेटे ने अपनी गाड़ी के नीचे 6 किसानों को बेहरमी से कुचल दिया। और सब परिवार यह कहते हैं कि हमें पेसै नहीं चहिए हमे न्याय चाहिए। हमें न्याय दिलवाने वाला इस सरकार में नहीं दिख रहा है। आपने देखा कि सरकार ने पूरी तरह से उस मंत्री और उस मंत्री के बेटे को बचाने में लगी रही। पुलिस और प्रशासन विपक्ष के नेताओं को रोकने में लगी थी। जब मैंने रात में वहां जाने की कोशिश की। तब हर सड़क पर पुलिस थी। मुझे रोकने की कोशिश की, तमाम पुलिस के घेरे थे, नाकाबंदी थी। जो पीड़ित परिवार हैं, उनके घरों में उन्हें नजरबंद किया गया। लेकिन अपराधी को पकड़ने के लिए एक भी पुलिस वाला नहीं निकला। अपराधी के घर में उन्होंने निमंत्रण भेजा। आप आकर हमसे बात करिए। आपने किसी भी देश में, दुनिया के किसी भी देश में या इस देश के इतिहास में कभी ऐसा देखा है कि एक आदमी 6 किसानों को कुचल दे, 6 लोगों की हत्या कर दे और उसको पुलिस निमंत्र दे रही है कि आइए हमसे बात करिए। आने कही यह देखा है? कभी इस देश और दुनिया के इतिहास में ऐसा नहीं हुआ होगा।”

प्रियंका गांधी ने कहा, “यहां के मुख्यमंत्री मंच पर बैठे उस मंत्री का बचाव कर रहे हैं। जिसके बेटे ने ऐसा काम किया है। जो प्रधानमंत्री लखनऊ आ सकते थे, वो दो घंटे की दूरी पर लखीमपुर खीरी नहीं जा सकते थे उन किसानों के हाथ पकड़ने के लिए, उनके आंसू पोछने के लिए। जिस आजादी का अमृत उत्सव मना रहे हैं, ये आजादी हमें किसने दी है। ये हमें किसानों ने दी है। किसान के बेटे ने दी है। इस देश को किसान ने सींचा है। किसान का बेटा आज भी हमारी सीमाओं पर खड़ा है। ये किसान के बेटे हैं जो हमारी सुरक्षा कर रहे हैं। ये देश क्या है? ये देश एक आस्था है, एक उम्मीद है, इसी न्याय की उम्मीद पर इस देश को आजादी मिली। जब महात्मा गांधी जी आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए गए। उनके दिल में यह था कि मेरी जनता को मेरे लोगों को मेरे देश के किसानों, दलितों, महिलाओं को, गरीबों को न्याय मिलना चाहिए। न्याय पर हमारा संविधान आधारित है। लेकिन इस देश में न्याय की उम्मीद सब छोड़ चुके हैं।”


कांग्रेस महासचिव ने कहा, “अगर आप जागरूक नहीं बनेंगे। आप इनकी राजनीति में उलझे रहेंगे तो न आप अपने आप को बचा पाएंगे और न देश को। आप किसान हो, इस देश की आत्मा हो। मंच पर जितने भी नेता बैठे हैं, आपने बनाया है उन्हें, जो आपको आंदोलनकारी कहते हैं, आतंकवादी कहते हैं, उनको न्याय देने के लिए मजबूर करिए। कांग्रेस के जितने भी कार्यकर्ता हैं, किसी से नहीं डरते हैं। हमें जेल में डालिए, हमें मारिए, हमें कुछ भी कर लीजिए, हम लड़ते रहेंगे, जब तक गृह राज्यमंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, हम लड़ते रहेंगे, हिलेंगे नहीं।”

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Published: 10 Oct 2021, 4:33 PM