काश! सीआरपीएफ की ये मांग मान ली जाती तो नहीं होता हमला, गृह मंत्रालय ने नहीं सुनी बात

जम्मू में बर्फबारी के चलते कई जवान फंस गए थे। पिछला काफिले ने 4 फरवरी को यात्रा शुरू की थी। इसलिए सीआरपीएफ हेडक्वार्टर से एयर ट्रांजिट के लिए रिक्वेस्ट की गई थी। उन्होंने रिक्वेस्ट, गृह मंत्रालय के पास बढ़ा दी थी। लेकिन मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

फोटो: IANS
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तो क्या सीआरपीएफ पर हुए हमले को टाला जा सकता था? अगर सीआरपीएफ की ये मांग मान ली जाती तो आतंकवादी अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाते। न्यूज पोर्टल ‘द क्विंट’ ने सीआरपीएफ के एक सीनियर अधिकारी के हवाले से खबर छापी है, जिसमें कहा गया है कि सीआरपीएफ ने इस हफ्ते की शुरुआत में गृह मंत्रालय से एयर ट्रांजिट की मांग की थी। लेकिन उनकी इस मांग पर गृह मंत्रालय ने कोई ध्यान नहीं दिया।

बता दें कि, 14 जनवरी को पुलवामा जिले में सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था, इसमें 42 जवान शहीद हो गए थे। 78 गांडियों के इस काफिले में 25,00 जवान शामिल थे।

अधिकारी के मुताबिक, जम्मू में बर्फबारी के चलते कई जवान फंस गए थे। पिछला काफिले ने 4 फरवरी को यात्रा शुरू की थी। इसलिए सीआरपीएफ हेडक्वार्टर से एयर ट्रांजिट के लिए रिक्वेस्ट की गई थी। उन्होंने रिक्वेस्ट, गृह मंत्रालय के पास बढ़ा दी थी। लेकिन मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। अधिकारी ने न्यूज पोर्टल को बताया कि जवानों को हवाई रास्ते से ले जाना न केवल सुरक्षित होता है, बल्कि इसमें पैसा भी कम खर्च होता है, साथ ही कम वक्त भी लगता है।

बता दें कि 8 फरवरी को इंटेलीजेंस ब्यूरो ने सीआरपीएफ को एक लेटर लिखा था। इसमें एजेंसी से मूवमेंट के पहले इलाके को अच्छी तरह से साफ करने को कहा गया था। आईबी ने आईईडी के इस्तेमाल की भी आशंका जताई थी।

हमले को लेकर कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक गाड़ी इतनी मात्र में विस्फोटक के साथ काफिले तक कैसे पहुंचा? सवाल जवानों की सुरक्षा को लेकर भी उठ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल है कि एक व्हीकल 200 किलो विस्फोटक के साथ काफिले के पास पहुंचा कैसे? क्या घर से लौट रहे जवानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे?

इन सवालों के जवाब कुछ इस तरह मिले हैं।

  • काफिला गुरुवार सुबह 3 बजकर 30 मिनट पर चला था।
  • काफिले के पास 'रोड ओपनिंग पार्टी' भी थी।
  • काफिले के मूवमेंट के वक्त सिविल व्हीकल्स का मूवमेंट जारी रहता है, इन्हें रोका नहीं जाता।
  • यहां तक कि वे ओवरटेक कर सकते हैं, काफिले के गाड़ियों के बीच भी कई बार सिविल व्हीकल्स आ जाते हैं।
  • कुछ खतरनाक जगहों के आसपास पहुंचने पर काफिले में कुछ बुलेटप्रूफ व्हीकल्स को शामिल किया जाता है। इनका काम आतंकियों की फायरिंग रोकने का होता है।
  • काफिले में जिन बसों में जवान शामिल थे, वे बुलेट प्रूफ नहीं थीं।
  • ‘रोड ओपनिंग पार्टी’ रोड पर लगाए गए आईईडी को साफ करता है। आरओपी के क्लीयरेंस के बाद ही मूवमेंट होता है।
  • पुलावाम मामले में आईईडी से भरा व्हीकल अपोजिट लेन में बाईं ओर चल रहा था।
  • जैसे ही काफिला आतंकी के पास पहुंचा, उसने विस्फोटक से भरे कार को उड़ा दिया।

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Published: 16 Feb 2019, 7:19 PM