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महाराष्ट्र में मोदी सरकार के ‘सौभाग्य’ का हाल, मानोरा तालुका ने खोल दी सौ फीसदी काम की पोल

पीएम नरेंद्र मोदी ने जब घर-घर बिजली पहुंचाने का दावा करते हुए महत्वाकांक्षी योजना ‘सौभाग्य’ की घोषणा की तो लोगों को आस जगी कि अब उन्हें भी बिजली नसीब होगी। लेकिन सच्चाई यह है कि जमीन पर इस योजना का भी वही हाल है जो मोदी सरकार की तमाम बड़ी योजनाओं का हुआ है।

फोटोः सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

केंद्र की मोदी सरकार का दावा है कि ‘सौभाग्य’ योजना के तहत हर घर में बिजली देने का सौ फीसदी लक्ष्य पा लिया गया है। लेकिन जमीनी सच्चाई ये है कि कई जगहों पर बिजली के खंभे तक नहीं डाले गए और खंभे लग गए, तो तार नहीं पहुंचे और अगर कहीं खंभे और तार दोनों लगा दिए गए तो आज तक बिजली नहीं पहुंची है। इस योजना की जमीनी हकीकत से पाठकों को रूबरू कराने के लिए नवजीवन एक श्रंखला चला रहा है, जिसकी इस कड़ी में आज महाराष्ट्र में इस योजना का हाल बयान किया जा रहा है।

बिजली ने ऐसी रौशनी की है कि उसमें महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के झूठे दावे की पोल परत दर परत खुलने लगी है। बीते साल 27 दिसंबर को दावा किया गया था कि सौभाग्य योजना के तहत निर्धारित समय 31 दिसंबर से पहले ही राज्य के हर घर को बिजली से रौशन कर दिया गया है। लेकिन वाशिम जिला के मानोरा तालुका ने इस दावे की एक महीने बाद ही पोल खोल दी।

इस तालुका के 77 गांव अब भी अंधेरे में हैं। ये गांव पोहरादेवी और दापुरा क्षेत्र के हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि बीते साल 7 फरवरी को ही पंचायत समिति के माध्यम से पंचायत को गरीबी रेखा से नीचे के उन परिवारों की सूची सौंपी गई थी जिनके घर बिजली नहीं है। अब तो एक साल पूरे होने के बाद भी इन परिवारों के लोग रौशनी के लिए तरस रहे हैं। बिजली विभाग की लापरवाही से गांव वालों में गुस्सा भी है। इधर मानोरा महावितरण के उप कार्यकारी अभियंता विलास वाघ ने स्वीकार करते हुए कहा है कि पोहरादेवी और दापुरा के कुछ गांवों में बिजली नहीं पहुंची है और बचे हुए गांवों में बिजली पहुंचाई जाएगी।

राज्य का मानोरा ही इकलौता तालुका नहीं है जहां के कई गावों में सौभाग्य योजना नहीं पहुंची है। गढ़चिरौली जिले के 62 गांवों में भी बिजली के तारों का जाल नहीं बिछाया जा सका है। महाराष्ट्र राज्य विद्युत मंडल के संचालक विश्वास पाठक के मुताबिक ये गांव अति दुर्गम, जंगल और पहाड़ों से घिरे हैं। यहां नक्सली गतिविधियां ज्यादा हैं। इसलिए बिजली के तार ले जाना मुश्किल है।

ऐसी स्थिति में सौर ऊर्जा विभाग से कहा गया है कि इन गांवों में बिजली की व्यवस्था करे। यहां 625 ग्रामीण आवेदन देकर भी बिजली की बाट जोह रहे हैं। लेकिन थोड़ी अजीब स्थिति यह लगती है कि सौभाग्य योजना के तहत ही अमरावती के बुलुमगवान गांव के अलावा मुंबई से 10 किलोमीटर दूर घरापुरी टापू यानी एलिफेंटा में 70 साल बाद बिजली पहुंचा दी गई। उधर, नक्सलियों के नाम पर गढ़चिरौली के 62 गांवों में जंगल और पहाड़ों का बहाना बनाया जा रहा है।

सरकारी दावों के मुताबिक गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों को मुफ्त में बिजली दी गई है तो थोड़े सक्षम लोगों को 500 रुपये में। उनसे ये 500 रुपये बिजली के 10 बिलों में वसूले जाएंगे। मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के दावों के मुताबिक राज्य में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण कर हो गया है।

साल 2011 के सामाजिक, आर्थिक आधार पर जातीय जनगणना के मुताबिक 10 लाख 93 हजार 614 लाभार्थी परिवारों की सूची तैयार की गई। इसमें से 10 लाख 67 हजार 603 लाभार्थियों को महावितरण ने पारंपरिक पद्धति से बिजली दी है तो बाकी 26 हजार 11 को महाराष्ट्र राज्य ऊर्जा विकास प्राधिकारण ने सौर ऊर्जा के जरिए बिजली दिलाई। इसमें सबसे अधिक पुणे जिले में एक लाख 48 हजार 264 घरों में बिजली देकर रौशनी की गई।

सरकार ने सौभाग्य योजना के लाभार्थियों के आंकड़ों में भी खेल खेला है। इसमें पंडित दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के 3 लाख 96 हजार 196 लाभार्थियों को भी जोड़ दिया गया है जिसकी सूची सौभाग्य योजना से पहले से ही बनी हुई थी और उसे बिजली देने का काम किया जा रहा था।

सौभाग्य योजना को सफल बनाने के लिए भले ही महावितरण ने घरों में बिजली पहुंचा दी है लेकिन बिजली पहुंचाने के बाद अब राज्य में बिजली महंगी भी हो गई है। कहा जा रहा है कि जिनको 500 रुपये में बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं, अब उनको भी महंगी बिजली का भार उठाना पड़ रहा है।महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग ने पिछले साल 1 सितंबर से ही किसानों और घरों के लिए महंगी बिजली दरों की घोषणा कर दी है।

बिजली महंगी करने वाली कंपनियों में महावितरण, बेस्ट, अडानी और टाटा हैं। राज्य के ग्रामीण हिस्सों में किसानों को बिजली सप्लाई करने वाली महावितरण की बिजली की दरें भी 3.35 रुपये से बढ़ाकर 3.55 रुपये प्रति यूनिट कर दी गई हैं। इसी तरह महावितरण की ओर से सप्लाई होने वाली घरेलू बिजली की दरें100 यूनिट तक के लिए 5.07 रुपये से बढ़ाकर 5,31 रुपये प्रति यूनिट और 101 से 300 यूनिट तक के लिए 8.74 से बढ़ाकर 8.95 रुपये प्रति यूनिट हो गई है।

वैसे, महावितरण की आर्थिक हालत भी अच्छी नहीं है। ऐसे में वह मुफ्त में कब तक बिजली दे पाएगी, यह कहना मुश्किल है। महावितरण सरकारी बिजली वितरण इकाई है। उसके उपभोक्ताओं पर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये बकाए हैं जिसे वह वसूल नहीं पा रही। महावितरण की आर्थिक हालत ठीक नहीं होगी तो कुछ महीने बाद ही सौभाग्य योजना के अंतर्गत तार पहुंचा भी दिया जाए, तो भी बिजली मिलने से रही।

(नवजीवन के लिए महाराष्ट्र से नवीन कुमार की रिपोर्ट)

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