मुस्लिम डिलीवरी ब्वॉय से खाना लेने से मना करने वाले को जोमैटो का जवाब- खाने का कोई धर्म नहीं होता

जोमैटो के संस्थापक दीपेंद्र गोयल ने भी ग्राहक को करारा जवाब देते हुए कहा कि कंपनी को भारत के मूल्यों और अपने भागीदारों व उपभोक्ताओं की विविधता पर गर्व है। इन्हीं मूल्यों के कारण अगर हमारे कारोबार को कुछ नुकसान भी होता है तो इस बात का कोई अफसोस नहीं है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

एक-दूसरे धर्म के प्रति दुर्भावना का एक मामला अब मध्य प्रदेश के जबलपुर में ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवा देने वाली कंपनी जोमैटो के साथ सामने आया है। लेकिन इस मामले में कंपनी ने जो जवाब दिया है, वह काबिलेतारीफ है और इस तरह की सोच रखने वालों को आईना दिखाने वाला है। कंपनी के जवाब की सोशल मीडिया पर कई लोग तारीफ कर रहे हैं।

दरअसल जबलपुर के रहने वाले अमित शुक्ला नाम के एक ग्राहक ने जोमैटो से खाना ऑर्डर किया था। शुक्ला को जब खाना पहुंचाने एक मुस्लिम डिलीवरी ब्वॉय पहुंचा, तो उन्होंने खाना लेने से इनकार करते हुए जोमैटो से दूसरा डिलिवरी ब्वॉय भेजने के लिए कहा। इसपर कंपनी ने भोजन पहुंचाने वाले डिलीवरी ब्वॉय के धर्म को लेकर ग्राहक की शिकायत मानने से इनकार कर दिया।

इसके बाद शुक्ला ने ट्वीट कर कहा, “मैंने अभी-अभी जोमैटो से एक ऑर्डर कैंसिल किया है, क्योंकि उन्होंने मेरा खाना एक गैर-हिन्दू व्यक्ति के हाथों से भेजा। शिकायत करने पर उन्होंने कहा कि वे उसे न तो बदल सकते हैं और न ही ऑर्डर रद्द कर पैसा वापस कर सकते हैं। मैंने कहा कि मुझे खाना लेने के लिए आप बाध्य नहीं कर सकते। मुझे पैसे वापस नहीं चाहिए, बस मेरा ऑर्डर रद्द करो।” शुक्ला ने कस्टमर केयर से बातचीत का स्क्रीनशॉट लगाते हुए कहा कि वह इस बारे में अपने वकील से सलाह लेगा।

इसके बाद शुक्ला की धार्मिक भेदभाव और कट्टरता दिखाने वाले आचरण पर जोमैटो ने उसे करारा जवाब देते हुए बढ़िया सबक भी दिया। जोमैटो ने जवाब में ट्वीट किया, “खाने का कोई धर्म नहीं होता है। खाना खुद में ही एक धर्म है।” जोमैटो अपने रुख पर टिकी रही और डिलिवरी ब्वॉय को बदलने से मना कर दिया।


इसके बाद जोमैटो के संस्थापक दीपेंद्र गोयल ने भी ग्राहक की शिकायत पर कड़ी टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया, “कंपनी को भारत के विचार, अपने भागीदारों और शानदार उपभोक्ताओं की विविधता पर गर्व है। अपने इन्हीं मूल्यों के कारण अगर हमारे कारोबार को कुछ नुकसान भी होता है तो हमें इस बात का कोई अफसोस नहीं है।” सूत्रों के अनुसार गोयल ने देश के बुनियादी सिद्धांतों और मूल्यों पर टिके रहने के लिए कंपनी की टीम की सराहना की है।

कंपनी के इस जवाब और रुख की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफें हो रही हैं। जोमैटो के इस कदम की जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और देश के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी तारीफ की है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जोमैटो को सम्मान। धन्यवाद, जो आपने इस ऐप को पसंद करने का कारण दिया। एसवाई कुरैशी ने भी दीपेंद्र गोयल को सलाम करते हुए लिखा, “आप भारत की सच्ची तस्वीर हैं। हमें आप पर गर्व है।”

गौरतलब है कि देश में एक-दूसरे धर्म के प्रति दुर्भावना लगातार बढ़ती जा रही है। इसका नतीजा इतना खतरनाक होता जा रहा है कि अब रोजमर्रा की सामाजिक जिंदगी में लोग इसी तरह की मानसिकता के साथ एक-दूसरे से व्यवहार करने लगे हैं। चाहे वह जबलपुर में जोमैटो से जुड़ा मामला हो या कुछ दिनों पहले ओला टैक्सी के ड्राइवर के मुस्लिम होने की वजह से ग्राहक द्वारा कंपनी से दूसरा ड्राइवर भेजने की मांग का मामला हो। हालांकि, इस घटना में भी कंपनी ने ग्राहक को जो जवाब दिया था, उसकी काफी सराहना हुई थी।

अभिषेक मिश्रा नाम के एक शख्स ने कुछ दिन पहले ओला कैब को इसलिए कैंसल कर दिया था क्योंकि कैब का ड्राइवर मुसलमान था। इसके बाद उसने कैंसल करने का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा कि वह अपने पैसे 'जिहादियों' को नहीं देना चाहते। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ओला ने लिखा, “देश की तरह ओला भी एक सेक्युलर प्लेटफॉर्म है। हम अपने ड्राइवर्स और कस्टमर्स में जाति, धर्म, लिंग या पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं करते। हम अपने सभी ग्राहकों और ड्राइवर्स से ये आग्रह करते हैं कि वे एक-दूसरे से सम्मान के साथ व्यवहार करें।” खास बात ये है कि अभिषेक को ट्विटर पर कई केन्द्रीय और यूपी सरकार के मंत्री फॉलो करते हैं।

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