लोकतंत्र के पन्ने: साढ़े तीन महीने चला था 1957 का लोकसभा चुनाव, 494 सीटों के लिए डाले गए थे वोट 

दूसरा लोकसभा चुनाव करीब साढ़े तीन महीने तक चला। यह चुनाव 24 फरवरी से 9 जून के बीच संपन्न हुआ। इस चुनाव में 494 सीटों के लिए वोट डाल गए और 19 करोड़ 37 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दूसरे आम चुनाव में 46 फीसदी वोटिंग हुई।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

1957 में भारत में दूसरा आम चुनाव कराया गया। इस चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने जीत हासिल की। पंडित जवाहरलाल नेहरू एक फिर प्रधानमंत्री बने। पहले लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार कांग्रेस को ज्यादा सीटें मिलीं।

इस बार भी कांग्रेस का मुकाबला सीपीआई, भारतीय जनसंघ, अखिल भारतीय हिंदू महासभा और अखिल भारतीय राम राज्य परिषद जैसे पार्टियों से थी। दूसरा लोकसभा चुनाव करीब साढ़े तीन महीने तक चला। यह चुनाव 24 फरवरी से 9 जून के बीच संपन्न हुआ। इस चुनाव में 494 सीटों के लिए वोट डाल गए और 19 करोड़ 37 लाख लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। दूसरे आम चुनाव में 46 फीसदी वोटिंग हुई। पंजाब के कांगड़ा में सबसे कम सिर्फ 16.94 फीसदी लोगों ने वोट डाले। जबकि केरल के कोट्टायम में एक बार फिर से सबसे ज्यादा 75.68 फीसदी वोट पड़े।

इस बार के चुनाव में 16 पार्टियां और कई सौ निर्दलीय उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। 1957 के दूसरे आम चुनाव में सिर्फ दो ही पार्टियां दहाई का आंकड़ा छू पाईं। ये दो कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी थीं। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) ने 27 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को 19 सीटें मिली थीं। वहीं 371 सीटें हासिल कर कांग्रेस लगातार दूसरी बार सत्ता में आई। इस बार कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 3 फीसदी ज्यादा वोट मिले। कांग्रेस ने 1957 के आम चुनाव में करीब 48 फीसदी वोट प्राप्त किए। चुनाव में कांग्रेस के बाद निर्दलियों को बोलबाला रहा। 542 निर्दलियों ने दूसरा आम चुनाव लड़ा और इनमें से 42 के सिर पर जीत का सेहरा बंधा। भारतीय जनसंघ को सिर्फ 4 सीटें मिली। इनके अलावा गणतंत्र परिषद पार्टी को 7 और फॉरवर्ड ब्लॉक ( मार्क्सिस्ट) पार्टी को 2 सीटों पर जीत हासिल हुई। दूसरे आम चुनाव में 45 महिला प्रत्याशी भी मैदान में थीं जिनमें 22 ने जीत दर्ज की।

चुनाव के बाद 18 अप्रैल 1957 को तीसरे नेहरू मंत्रिमंडल का गठन हुआ। 11 मई, 1957 को एम. अनंथसायनम आयंगर को सर्वसम्मति से नई लोकसभा अध्यक्ष चुना गया। उनका नाम प्रधानमंत्री नेहरू और सत्यनारायण सिन्हा द्वारा प्रस्तावित किया गया था। गृहमंत्री की जिम्मेदारी पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने संभाली। विदेश मंत्रालय का प्रभार जवाहरलाल नेहरू ने अपने ही पास रखा।

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