'...तो फिर चुनाव कराने का क्या मतलब है?' एसटी हसन ने चुनाव आयोग बताया BJP का विंग
सपा नेता एसटी हसन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए मतदाताओं के नाम काटने का काम कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सब कुछ पहले से तय ही है, तो फिर चुनाव कराने का क्या मतलब है?

समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान का समर्थन करते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक भूमिका से हटकर काम कर रहा है और अब वह बीजेपी का एक राजनीतिक विंग बनता नजर आ रहा है।
सीएम ममता बनर्जी का समर्थन
एसटी हसन ने आईएएनएस से कहा, "ममता बनर्जी को यह कहना चाहिए कि चुनाव आयोग बीजेपी का एक विंग बन गया है। बजाए इसके कि चुनाव आयोग एक 'व्हाट्सएप आयोग' बनकर रह गया है।"
बता दें कि ममता बनर्जी ने बुधवार को चुनाव आयोग को 'व्हाट्सएप कमीशन' कहा था।
सपा नेता एसटी हसन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए मतदाताओं के नाम काटने का काम कर रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सब कुछ पहले से तय ही है, तो फिर चुनाव कराने का क्या मतलब है? तानाशाही की तरह ही तय कर दें कि प्रधानमंत्री कौन होगा और मुख्यमंत्री कौन होगा।
हिमंता बिस्वा सरमा पर सवाल
इसी दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के 'मिया' वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए एसटी हसन ने कहा कि असम में 'मिया' समुदाय को लेकर आरोप लगाए जाते हैं कि वे बांग्लादेशी हैं। जब एक संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति यह कहता है कि अगर 'मिया' द्वारा चलाए जा रहे रिक्शे में किराया पांच रुपए तय है, तो चार रुपए ही देने चाहिए, तो यह बेहद अनैतिक बयान है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने खुले तौर पर दिए गए ऐसे बयानों के बावजूद मुख्यमंत्री के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। नैतिक मूल्यों का क्या हो गया है?
'दीपक को सलाम'
इसके अलावा उत्तराखंड में दुकानदार से जुड़े मामले में 'मोहम्मद दीपक' पर दर्ज एफआईआर को लेकर भी एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "हम दीपक को सलाम करते हैं और अल्लाह से दुआ करते हैं कि हर शहर में ऐसे कम से कम 20 दीपक जलने चाहिए।" उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो देश का माहौल बेहतर होगा और प्रेम व भाईचारे से भर जाएगा।
एसटी हसन ने दीपक को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, हर समुदाय के लोग उसके काम की सराहना कर रहे हैं। इसके बावजूद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
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