कोरोना अटैक में पराली के धुएं ने घोला जहर, दिल्ली में हो रही हैं कई गुना ज्यादा मौतें : गोपाल राय

कोरोना अटैक में पराली के धुएं ने जो जहर घोला है, उससे दिल्ली के लोगों के समक्ष जान का संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली सरकार के मुताबिक बीते 15 दिनों में इसके कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

फोटो: सोशल मीडिया
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रवि प्रकाश

कोरोना अटैक में पराली के धुएं ने जो जहर घोला है, उससे दिल्ली के लोगों के समक्ष जान का संकट खड़ा हो गया है। दिल्ली सरकार के मुताबिक बीते 15 दिनों में इसके कारण कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने में सबसे बड़ी भूमिका पंजाब, हरियाणा में जलाई गई पराली के धुएं की है। इस धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। पराली के धुएं ने दिल्ली के प्रदूषण स्तर को खतरनाक स्तर पर पहुंचाया, जिसकी वजह से दिल्ली के लोगों को सांस लेने में की तकलीफ में काफी बढ़ोतरी हो गई।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा, "दिल्ली के अंदर कोरोना के केस पहले भी आ रहे थे, लेकिन पिछले 15 दिनों में जब पराली के जलाने की घटनाएं बढ़ीं, उससे दिल्ली के लोगों के सामने जान का संकट खड़ा हो गया है। अगर हम नासा के चित्र को देखें तो ज्यों ज्यों पराली जलाने की घटनाएं बढ़ती गईं, दिल्ली की हवा जहरीली होती गई। हम सबको पता है कोरोना का अटैक हमारी सांसों पर होता है। कोरोना के अटैक में पराली के धुएं ने जिस तरह से जहर घोला उससे आज दिल्ली के लोगों के सामने जान संकट खड़ा हो गया है।"

दिल्ली सरकार के मुताबिक ऐसी स्थिति में न केवल दिल्ली बल्कि केंद्र सरकार और अन्य सभी लोगों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि स्थाई समाधान की ओर कदम बढ़ाएं, क्योंकि साल दर साल यह समस्या बढ़ती जा रही है और हम इसको टालते जा रहे हैं।


दिल्ली के अंदर पूसा के साथ मिलकर के दिल्ली सरकार ने बायो डी कंपोजर बनाया है। इसका उपयोग पराली को जलाने की बजाय गलाने के लिए किया गया। वह काफी सफल रहा है। रविवार को दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा गठित केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन समिति कमीशन के सामने एक याचिका दाखिल की।

गोपाल राय ने कहा, "याचिका में हमारा यही निवेदन है कि जिस तरह से दिल्ली में पराली के समाधान को लागू किया गया है, ऐसा ही अन्य राज्यों में भी लागू किया जाए। केंद्र सरकार पराली हटाने के लिए मशीन खरीदने हेतु सब्सिडी देती है। फिर भी किसान को अपनी जेब से पैसा डालना पड़ता है। लेकिन जितनी सब्सिडी सरकार दे रही है उससे आधे पैसों में ही खेतों में यह छिड़काव किया जा सकता है और इसमें किसानों को अपनी जेब से पैसा लगाने की जरूरत भी नहीं है। जहां तक प्रशिक्षण का सवाल है दिल्ली सरकार और पूसा इंस्टीट्यूट प्रशिक्षण देने के लिए तैयार हैं।"

गोपाल राय ने कहा कि, "पराली जलाने की जगह अगर इसे गला दिया जाए तो न केवल प्रदूषण से बचा जा सकता है, बल्कि साथ ही साथ पराली गलने से खेत में बेहतरीन खाद का निर्माण भी होता है। जिससे खेत की उर्वरक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा साल दर साल प्रदूषण जो एक ला-इलाज बीमारी है, इसे जड़ से खत्म किया जा सकता है। हमने यह याचिका इसी उम्मीद से लगाई है कि हमारे पास आज एक सस्ता और कारगर उपाय उपलब्ध है। इसको लेकर कमीशन अभी से निर्णय ले और सभी राज्य सरकारों के लिए इसे आवश्यक बनाया जाए ताकि अगली बार के लिए पराली की समस्या को जड़ से खत्म किया जा सके।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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