सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम ने केंद्र को फिर भेजा जस्टिस केएम जोसेफ का नाम

इससे पहले केंद्र सरकार ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति देने की कोलीजियम की सिफारिश को मंजूरी नहीं दी थी।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति देने के लिए उनका नाम एक बार फिर केंद्र सरकार को भेजने का फैसला किया है। शुक्रवार को हुई सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम की बैठक में कई हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के नामों के साथ ही जस्टिस के एम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति के मसले पर भी चर्चा हुई। लंबी चर्चा के बाद कोलीजियम ने जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति देने के लिए फिर से उनका नाम केंद्र को भेजने का फैसला किया है। कोलीजियम द्वारा फिर से जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश किये जाने के बाद अब केंद्र सरकार को इसे स्वीकार करना होगा। क्योंकि नियमों के मुताबिक एक बार केंद्र सरकार द्वारा वापस किये गए नाम को अगर सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम फिर से भेजती है तो सरकार को उसे स्वीकार करना पड़ता है।

शुक्रवार को हुई बैठक में कोलीजियम ने कई हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के नामों की भी सिफारिश की। कोलीजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्म-कश्मीर हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज अनिरुद्ध बोस को झारखंड हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की। इसके अलावा कोलीजियम ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज और केरल हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस ऋषिकेश रॉय को केरल हाई कोर्ट का मुख्य न्यायधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। आज की बैठक में कोलीजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस वी के ताहिलरमानी को मद्रास हाई कोर्ट और गुजरात हाई कोर्ट के एमआर शाह को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश किया है।

इससे पहले अप्रैल में कोलीजियम की सिफारिश में से मोदी सरकार ने इंदू मल्‍होत्रा के नाम को मंजूरी दे दी थी, लेकिन जस्‍टिस केएम जोसेफ का नाम वापस भेज दिया था। इसके पीछे केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया था कि कोलीजियम का प्रस्ताव शीर्ष अदालत के मानकों के तहत नहीं है। सरकार ने यह भी कारण बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में केरल से पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, जहां से जस्टिस केएम जोसेफ आते हैं। केंद्र के जोसेफ के नाम को रोके जाने को लेकर बहुत हंगामा खड़ा हो गया था। सुप्रीम कोर्ट के कई जजों के अलावा बड़ी संख्या में वरिष्ठ वकीलों ने केंद्र के फैसले पर नाराजगी जाहिर की थी।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जस्टिस जे चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को पत्र लिखकर कोलीजियम की बैठक बुलाने के लिए कहा था, ताकि जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नति देने के लिए केंद्र सरकार से दोबारा सिफारिश की जा सके। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के 100 वरिष्ठ वकीलों ने भी एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से अपील की थी कि वह बैठक बुलाकर सरकार के उस फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पास करे जिसमें जस्टिस के एम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को रोक दिया गया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कोलीजियम ने इस साल की शुरुआत में वरिष्ठ वकील इंदु मल्होत्रा और उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ की सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सिफारिश की थी। लेकिन, सरकार ने जस्टिस जोसेफ के नाम को अनदेखा करते हुए सिर्फ इंदु मल्होत्रा के नाम को ही मंजूरी दी। यहां ध्यान देने की बात यह है कि मौजूदा नियमों के मुताबिक या तो सरकार कोलीजियम की सिफारिश में मौजूद सभी नामों को मंजूर करती है या फिर सभी नामों को खारिज करती है। नियमानुसार सिफारिश में एक या कुछ नामों को चुना नहीं जा सकता।

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