राफेल: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछे कीमत समेत सौदे से जुड़े तीखे सवाल, लंबी सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित

राफेल डील की जांच की मांग वाली कई याचिकाओं पर बुधवार को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सरकार से राफेल डील की कीमत समेत सौदे से जुड़े कई तीखे सवाल पूछे।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राफेल डील को लेकर अहम सुनवाई हुई। कई घंटे चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने राफेल डील की जांच की मांग वाली कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इससे पहले चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने डील पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया कि राफेल डील के ऑफसेट नियमों में 2015 में बदलाव क्यों किया गया। कोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा, “इसमें देशहित क्या है? अगर डील का ऑफसेट पार्टनर कोई उत्पादन नहीं करता, तो क्या होगा?”

केंद्र का पक्ष रख रहे अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सवालों का जवाब देते हुए कोर्ट को बताया कि दसॉल्ट ने अब तक ऑफसेट पार्टनर का विवरण सरकार को नहीं दिया है। साथ ही उन्होंने कोर्ट में ये भी कहा कि 36 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी को लेकर फ्रांस की सरकार ने कोई गारंटी नहीं दी है, बल्कि वहां के प्रधानमंत्री ने इसके लिए एक ‘लेटर ऑफ कंफर्ट’ दिया है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश वकीलों ने डील पर कई गंभीर सवाल उठाते हुए अदालत की निगरानी में जांच की मांग की। याचिकाकर्ताओं में शामिल वरिष्ठ वकील एमएल शर्मा ने कोर्ट से कहा कि सरकार द्वारा दाखिल रिपोर्ट से यह पता चलता है कि मई 2015 के बाद निर्णय लेने में कई गंभीर घोटाले किए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूणण ने कोर्ट से कहा कि भूषण ने कहा कि राफ़ेल विमान खरीद में रक्षा सौदे की तय प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार बहाने बना रही है कि कीमत बताने को लेकर कोई गुप्त समझौता हुआ है। जबकि सच्चाई ये है कि नई डील में राफेल के दाम 40 फीसदी ज्यादा हैं। उन्होंने कहा, “हमने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत इस मामले में शिकायत दर्ज करने के लिए सीबीआई को आवेदन दिया था, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हमें सु्प्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा। इस मामले में सीबीआईजांच होनी चाहिए।”

वहीं आप नेता संजय सिंह के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ससंद में 36 राफेल विमानों की कीमतों का खुलासा दो बार किया जा चुका है, इसलिए सरकार के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि कीमतों को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

सुनावई के दौरान कोर्ट ने राफेल विमानों की जरूरत को समझने के लिए भारतीय वायु सेना के अधिकारियों का पक्ष भी जानना चाहा। पीठ ने कहा, ‘‘हम वायु सेना की जरूरतों पर विचार कर रहे हैं और हम राफेल विमान के बारे में वायु सेना के किसी अधिकारी से जानना चाहेंगे। हम इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय को नहीं बल्कि वायु सेना के अधिकारी को सुनना चाहते हैं।’’ जिसके बाद एयर वाइस मार्शल चलपति ने कोर्ट पहुंचकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सवालों का जवाब दिया।

इस पर सरकारी वकील केके वेणुगोपाल ने सौदे में गोपनियता के प्रावधान का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने राफेल की कीमत की जानकारी साझा कर दी है, लेकिन इसकी समीक्षा करना विशेषज्ञों का काम है। न्यायपालिका इसकी समीक्षा नहीं कर सकती है। इसपर पीठ ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमतों पर कोई भी बहस तभी हो सकती है जब इस सौदे के तथ्य जनता के सामने आने दिये जायें। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘हमें यह निर्णय लेना होगा कि क्या कीमतों के तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए या नहीं।’’

सुनवाई के दौरान राफेल डील की जांच की मांग के याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को संवैधानिक बेंच को सौंपने की भी मांग की। बुधवार को लगभग 4 घंटे चली सुनवाई के बाद पीठ ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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