प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित, न्यूनतम वेतन देने वाली याचिका पर केंद्र को भेजा नोटिस  

सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लागू लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों के बीच अनिश्चितता का माहौल है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

देशव्यापी लॉकडाउन के बीच असंगठित क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों को मजदूरी का भुगतान करने के लिए सरकार को निर्देश देने के लिए मानवाधिकार कार्यकर्ता हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को नोटिस जारी किया। सामाजिक संगठनों ने केंद्र सरकार से प्रवासी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान और लॉकडाउन से प्रभावित स्वरोजगार से प्रभावित गरीबों को तुरंत भुगतान करने की मांग की है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार से 7 अप्रैल तक जवाब देने को कहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर और अंजलि भारद्वाज द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि कोरोना वायरस को लेकर देश भर में लागू लॉकडाउन के चलते प्रवासी मजदूरों के बीच अनिश्चितता का माहौल है। राजधानी दिल्ली जैसे बड़े शहरों को छोड़कर मजदूर अपने गांव वापस लौटने की कोशिश में दिख रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने राज्यों से लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों की आवाजाही को रोकने के लिए राज्य और जिलों की सीमा को प्रभावी तरीके से सील करने को कहा है। इसके बाद से प्रवासी मजदूरों के लिए खाने पीने और अपने परिवार को पालने का संकट गहरा गया है।

फोटो: प्रमोद पुष्कर्णा
फोटो: प्रमोद पुष्कर्णा

जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण को सुना और केंद्र सरकार से 7 अप्रैल तक जवाब मांगा। पीठ ने यह भी कहा कि उसे विशेष रूप से "संकट के इस समय" में असंगठित क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर चिंता है। उधर, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह कहते हुए याचिका पर आपत्ति जताई है कि "ये PILकी दुकानें 'बंद होनी चाहिए। वास्तविक व्यक्ति ग्राउंड पर लोगों की मदद कर रहे हैं। AC कमरों में बैठना और PIL दाखिल करने से मदद नहीं होगी।"

फोटो : सोशल मीडिया
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आपको बता दें, गुरुवार को याचिकाकर्ताओं ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा दायर किया था, जिसमें कहा गया कि सरकार द्वारा दिए गए आदेशों के बावजूद कई प्रवासी श्रमिक अभी भी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों के आदेश के बावजूद कि ठेकेदारों को इन श्रमिकों को पूरी मजदूरी का भुगतान करना होगा, ठेकेदार मज़दूरों को कम भुगतान कर रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार के आदेशों के बाद भी पिछले दो दिनों में बहुत बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिकों को उनके आवास से बाहर निकाल दिया गया।


फोटो: प्रमोद पुष्कर्णा
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इससे पहले केंद्र सरकार ने कहा था कि लॉकडाउन के दौरान गरीब, जरूरतमंद लोगों और दिहाड़ी मजदूरों को भोजन, आश्रय मुहैया कराने के लिए समुचित इंतजाम किए जाएंगे। सरकार की ओर से निर्देश दिया जा चुका है कि जो भी लोग घरों के लिए निकले हैं, उन्‍हें राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश की सरकारें हेल्‍थ प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी जांच करने के बाद कम से कम 14 दिन के लिए क्‍वारंटीन सेंटर में रखें। सरकार की ओर से सभी नौकरी प्रदाताओं को निर्देश दिया गया है कि वे उनके यहां काम करने वाले सभी कर्मचारियों को बिना किसी कटौती के वेतन दें।

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