शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, बंगाल की पहली BJP सरकार का नेतृत्व करेंगे, ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शनिवार को शपथ ली। अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने वाले बीजेपी के पहले नेता हैं।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शनिवार को शपथ ली। अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बनने वाले बीजेपी के पहले नेता हैं।
राज्यपाल आर. एन. रवि ने यहां ब्रिगेड परेड मैदान में आयोजित भव्य समारोह में अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।
इस दौरान बीजेपी विधायकों दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, निशीथ प्रामाणिक और क्षुदिराम टुडू ने भी राज्य के मंत्रियों के रूप में शपथ ली।
8 मई को बीजेपी विधायक दल ने सुवेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना तय हो गया था।
ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर तीन दशक से अधिक लंबा रहा है। उन्होंने 1995 में कांथी नगरपालिका से पार्षद के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद वे तीन बार पार्षद रहे और कांथी नगरपालिका के चेयरमैन भी बने। उन्हें 20 साल से अधिक का विधायी अनुभव है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और पांच साल तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।
राज्य सरकार में रहते हुए उन्होंने परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। इसके अलावा वे हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरमैन भी रहे। हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में अहम भूमिका निभाई। सहकारिता आंदोलन में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। वे एग्रीकल्चर रूरल बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रह चुके हैं।
15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के करकुली गांव में जन्मे सुवेंदु अधिकारी ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से एम.ए. की पढ़ाई की है। वे पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री शिशिर अधिकारी के पुत्र हैं और फिलहाल अविवाहित हैं।
सुवेंदु अधिकारी 2007 के नंदीग्राम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे, जिसने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई थी। वे लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस में रहे और 2020 तक ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी थे। दिसंबर 2020 में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थाम लिया था।
पीटीआई और आईएएनएस के इनपुट के साथ
