मंडी उपचुनाव में पसरी खामोशी, क्‍या मतदाताओं के बीच कोई अंडर करंट फैसले की घड़ी का कर रहा है इंतजार?

हिमाचल में छोटी काशी के नाम से ख्‍यात मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव में मतदाताओं में एक अजीब सी खामोशी पसरी है। यहां तक कि मंडी शहर में पसरा सन्‍नाटा कहीं से भी आभास नहीं देता कि यहां चुनाव हो रहा है।

फोटो: धीरेंद्र अवस्थी
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धीरेंद्र अवस्थी

हिमाचल में छोटी काशी के नाम से ख्‍यात मंडी संसदीय सीट के उपचुनाव में मतदाताओं में एक अजीब सी खामोशी पसरी है। यहां तक कि मंडी शहर में पसरा सन्‍नाटा कहीं से भी आभास नहीं देता कि यहां चुनाव हो रहा है। लेकिन इस सन्‍नाटे के पीछे समाये लोगों के बेपनाह दर्द, उनकी खीज, कोविड कॉल में हुई तबाही और उससे पनपे आक्रोश के संकेत भी हैं। कुछ न कह कर भी मतदाता शायद बहुत कह रहे हैं। महंगाई का भी गुस्‍सा है। लेकिन बमुश्किल बोलने के लिए तैयार होते लोगों की अंत में बोली जा रही एक लाइन ‘राजा साहब (वीर भद्र सिंह) जैसा न कोई हिमाचल में हुआ है और न होगा’ के पीछे क्‍या कोई संदेश छिपा है। जाहिर है, यहां के खामोश मतदाताओं के बीच कोई अंडर करंट है, जो साफ महसूस हो रहा है। 30 अक्‍टूबर को होने वाले मतदान में यह किस रूप में व्‍यक्‍त होगा यह देखने वाली बात होगी।

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हिमाचल के मंडी शहर के बारे में स्‍थानीय लोग एक बात बड़े फक्र के साथ बोलते हैं कि मुंबई से फैशन उतरकर सीधे मंडी आता है। इस शहर की जान इंद्रा मार्केट में लगने वाली महफिलों में लोग बेबाक अंदाज में अपन बात कहते हैं। पर इस बार खामोशी है। कोरोना की त्रासदी के दर्द से भी लोग अभी उबर नहीं पाए हैं। चुनाव की बात करने पर लोग बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। मुश्किल से बोलने के लिए तैयार लोग अंत में मानों कम शब्‍दों में बहुत कुछ उड़ेल देना चाहते हैं। भूतनाथ बाजार में कपड़ों के विक्रेता हरजीत सिंह की आंखों में तो अपनी पीड़ा बताते-बताते आंसू आ गए। उन्‍होंने कोविड से अपनों को खोया है। वह कहते हैं कि कोरोना ने हमें 30 साल पीछे धकेल दिया। इस सरकार ने हमें सिर्फ बेवकूफ बनाया है। धंधा बर्बाद हो गया। लॉकडाउन में दुकानें बंद थीं फिर भी सरकार ने 16 हजार का बिजली बिल भेज दिया। जब सवाल किया तो जवाब मिला कि पहले जितना आपका औसत बिल आता था उतना ही भेजा है। हरजीत कहते हैं कि सरकार के पास इस बात का जवाब नहीं है कि जब दुकानें ही बंद थीं तो बिल किस बात का भेजा गया।

फोटो: धीरेंद्र अवस्थी
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गांधी चौक पर लाहौरिया दी हट्टी के नाम से 70 साल से हलवाई की दुकान कर रहे संदीप चुनाव के प्रति उदासीनता व्‍यक्‍त करते हुए कहते हैं कि लोगों में अब पहले जैसा लगाव खत्‍म हो गया है। कौन किसको वोट दे रहा है अब कोई बताता नहीं है। लेकिन अंत में एक बात वह कहते हैं कि इतने मुख्‍यमंत्री प्रदेश में हुए, लेकिन जो बात राजा वीरभद्र सिंह में थी वह किसी में नहीं मिली। गांधी चौक पर 40 साल से चाय की दुकान चला रहे ओमप्रकाश का कहना है कि कोरोना काल में सभी की कमर टूट गई है। अपनी बात कहते-कहते वह कहते हैं…लेकिन राजा साहब का कोई तोड़ नहीं। वह शानदार आदमी थे। मंडी शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित गांव टांडू से रोजाना आकर रंगोली में इस्‍तेमाल होने वाले मिट्टी के गेर और गोलू बेच रही कौशल्‍या कहती हैं कि राजा साहब ने गरीब और अमीर समेत हमेशा सभी की सुनी है। भूतनाथ बाजार में हलवाई की दुकान करने वाले राकेश चुग कहते हैं कि कहने के लिए तो सीएम जयराम ठाकुर मंडी से हैं, लेकिन सरकार के चार साल पूरे हो जाने के बाद भी उनके पास लोगों को बताने के लिए क्‍या है जिससे लोग उन्‍हें याद रखें। सीएम सड़कों से चलते नहीं, तो उन्‍हें सड़कों की हालत तक पता नहीं है। कारोबार खत्‍म हो गया है। राकेश चुग कहते हैं कि जो रिफाइंड पहले 1170 रुपये का मिलता था वह अब 2470 रुपये का मिल रहा है। मान लो पहले हमारा महीने का खर्च 10 रुपये था तो 4-5 हजार बच जाते थे। अब खर्च ही 15 हजार हो गया है तो बचेगा क्‍या। दिहाड़ीदार बेलीराम का कहना था कि बमुश्किल दिहाड़ी मिलती है। एचआरटीसी से रिटायर चमनलाल का कहना था कि 2019 से उन्‍हें डीए नहीं मिला है। पेंशन भी 2-3 महीने नहीं आती। वह कहते हैं कि इन हालात में वीरभद्र सिंह के दिन याद आते हैं। बसों का किराया पहले पांच किलोमीटर तक चार रुपये था। अब एक किमी भी जाओ तो 10 रुपये किराया पड़ता है। गैस सिलेंडर 400 रुपये से 1000 रुपये हो गया। लॉकडाउन में सरकार ने दो हजार रुपये देने का ऐलान किया था वह भी पूरा नहीं हुआ। टमाटर 80 रुपये किलो, शिमला मिर्च 170 रुपये और मटर 160 रुपये हो गई है। मंडी आईआईटी में कैंटीन चलाने वाले दीपक शर्मा का कहना है कि कोरोना में उनका कैंटीन का काम भी खत्‍म हो गया। वह कहते हैं कि जयराम ठाकुर ने सिर्फ प्रोजेक्‍ट के ऐलान किए हैं। क्‍लस्‍टर यूनिवर्सिटी, व्‍यास पुल, 1500 करोड़ से शिवधाम का निर्माण और इंटरनेशनल एयरपोर्ट आदि, लेकिन क्‍या इनमें से एक भी प्रोजेक्‍ट जमीन पर उतरा है। दूध का कारोबार करने वाले पद्दर के लियाकत अली कहते हैं कि कोराना में सब खत्‍म हो गया। वह एपीएल कैटेगरी में आते हैं, लेकिन पांच किलो राशन भी उन्‍हें नहीं मिला। खेती-बाड़ी का काम करने वाले द्रंग निवासी दीपचंद कहते हैं कि उन्‍हें तो महंगाई ने मार दिया। राकेश चुग कहते हैं कि मतदान से दो दिन पहले अगर सत्‍ताधारी दल की तरफ से शराब और पैसे का खेल नहीं हुआ तो चुनाव परिणाम कुछ और होगा।

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17 विधानसभा और छह जिलों में फैला है मंडी लोकसभा क्षेत्र

हिमाचल में वैसे तो चार उप-चुनाव हो रहे हैं। इनमें मंडी में लोकसभा के लिए, जबकि जुब्‍बल कोटखाई, अर्की और फतेहपुर में विस के लिए 30 अक्‍टूबर को मतदान होना है। लेकिन सबसे ज्‍यादा चर्चा अगर किसी चुनाव की है तो वह भाजपा सांसद रामस्‍वरूप शर्मा के सुसाइड कर लेने के बाद खाली हुई मंडी लोक सभा सीट की है। यहां भाजपा से ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर और कांग्रेस से दिवंगत पूर्व मुख्‍यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्‍नी प्रतिभा सिंह चुनाव लड़ रही हैं। मंडी वीरभद्र सिंह की कर्मभूमि रहा है। यहां चर्चा भी सबसे ज्‍यादा राजा साहब (लोग उन्‍हें प्‍यार से इसी नाम से पुकारते थे) यानि वीरभद्र सिंह की ही है। मंडी संसदीय क्षेत्र के 17 विधानसभा क्षेत्रों में 33.6 फीसदी राजपूत, 21.4 फीसदी ब्राह्मण और 29.85 फीसदी अनुसूचित जाति की आबादी है। संसदीय क्षेत्र छह जिलों के 17 विधानसभा क्षेत्रों में फैला है। इनमें पांच विधानसभा क्षेत्र रामपुर, आनी, बल्ह, नाचन व करसोग अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मंडी जिले के नौ और कुल्लू के चार विधानसभा क्षेत्र हैं। चंबा जिले का एक भरमौर और शिमला का एक रामपुर है। इनके अलावा लाहौल स्पीति और किन्नौर विधानसभा हलके आते हैं। एरिया के मुताबिक तकरीबन आधा हिमाचल इस लोस क्षेत्र में आता है। वर्ष 1952 से अब तक हुए संसदीय चुनावों में यहां 5 बार भाजपा, जबकि 12 बार कांग्रेस का कब्‍जा रहा है।

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