बंगाल विधानसभा में पेश हो सकता है UCC बिल, BJP-TMC के बीच टकराव की स्थिति
बीजेपी के लिए यह विधेयक उसके मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने और इस लंबे समय से चली आ रही बात को दोहराने जैसा है कि सभी नागरिकों पर एक जैसे नागरिक कानून लागू होने चाहिए।

पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को चार महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन और ओबीसी आरक्षण संशोधन शामिल हैं। वहीं, अन्य दो विधेयक राज्य में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी की गतिविधियों को रोकने से संबंधित हैं।
हालांकि, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित प्रस्तावित विधेयक पेश किया जाएगा या मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी प्रस्तावित यूसीसी विधेयक की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति के गठन की घोषणा करेंगे।
विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों या भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) द्वारा इन दोनों संभावनाओं की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है लेकिन घटनाक्रम से अवगत सूत्रों का कहना है कि दूसरे विकल्प के पूरे होने की संभावना पर जोर है। गठित की जाने वाली समिति की अध्यक्षता के लिए सर्वोच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त) से संपर्क किया जा सकता है।
इस प्रस्तावित कानून का मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों के लिए धर्म से परे एक समान नागरिक प्रारूप बनाना है। उम्मीद है कि यह मौजूदा बजट सत्र में चर्चा का मुख्य विषय रहेगा और पहचान, समानता, धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक अधिकारों और ‘पर्सनल कानून’ व राज्य के अधिकार के बीच संबंधों पर व्यापक बहस का आधार बनेगा।
बीजेपी के लिए यह विधेयक उसके मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने और इस लंबे समय से चली आ रही बात को दोहराने जैसा है कि सभी नागरिकों पर एक जैसे नागरिक कानून लागू होने चाहिए।
वहीं विपक्ष के लिए यह सामाजिक सहमति, संवैधानिक सुरक्षा और इस बात पर सवाल उठाता है कि क्या अलग-अलग समुदायों पर असर डालने वाले सुधार को बिना व्यापक बातचीत के लागू किया जा सकता है।
यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी के ‘संकल्प पत्र’ में वादे के तहत तय की गई छह महीने की समय-सीमा से काफी पहले उठाया जा रहा है।
शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने संकेत दिया कि सरकार मौजूदा सत्र में इस कानून को आगे बढ़ाने का इरादा रखती है।
उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से गुजरात, उत्तराखंड और असम में एक प्रक्रिया का पालन करते हुए इसे (यूसीसी) लागू किया गया , उसी तरह पश्चिम बंगाल में भी इसे लागू किया जाएगा। मैं सोमवार को विधानसभा को इस बारे में जानकारी दूंगा।’’
उनके इन बयानों से यह साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी सरकार अपने प्रमुख चुनावी वादों में से एक पर तेजी से आगे बढ़ना चाहती है और बंगाल के लिए वैसा ही प्रारूप तैयार करना चाहती है जैसा दूसरे बीजेपी-शासित राज्यों में अपनाया गया है।
विधेयक पेश किए जाने से पहले प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इस प्रस्ताव से जुड़ी मुख्य चिंताओं में से एक को दूर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत सुरक्षित आदिवासी समुदाय इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
शुक्रवार को पार्टी के विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बैठक में टीएमसी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी को निर्देश दिया कि वे विधानसभा के अंदर और बाहर इस विधेयक का जोरदार विरोध करें।
उन्होंने तर्क दिया कि यह विधेयक संवैधानिक नैतिकता, सामाजिक सहमति और भारत की विविधतापूर्ण प्रकृति के बारे में बड़े सवाल खड़े करता है।
आईएएनएस और पीटीआई के इनपुट के साथ
