यूपी: प्रियंका गांधी ने चित्रकूट में महिलाओं में भरा जोश, कहा- सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट पर करीब 5,000 महिलाओं के समूह से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में मंदाकिनी नदी के किनारे रामघाट पर करीब 5,000 महिलाओं के समूह से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, वकीलों और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों सहित महिलाओं ने घर और काम पर अपनी समस्याओं के बारे में बात की और पार्टी द्वारा महिलाओं के लिए घोषित आरक्षण की सराहना की।

अपने संबोधन में प्रियंका ने कहा कि प्रदेश की स्थिति बहुत खराब है। खाद की लाइन में खड़े-खड़े कई लोगों ने जान गंवाई। कोरोना काल में बीजेपी सरकार फ्लॉप रही। महिलाओं में जोश भरते हुए प्रियंका ने कहा कि- बहुत हुआ इंतजार अब, सुनो द्रौपदी शस्त्र उठालो अब गोविंद ना आएंगे। औरों से कब तक आस लगाओगी। कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से। महिलाओं को एक जुट होकर राजनीति में अपना हक मांगना चाहिए। कांग्रेस पार्टी 40 प्रतिशत महिलाओं को टिकट देगी। उन्होंने अपना प्रतिज्ञा पत्र महिलाओं को पढ़कर सुनाया। कहा कि किसानों का पूरा कर्जा माफ किया जाएगा। 

प्रियंका गांधी ने उन्हें आश्वासन दिया कि पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर संभव मदद करेगी। 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' के नारे पर केंद्रित इस कार्यक्रम में समाज के सभी तबकों की महिलाएं- (मुख्य रूप से निम्न-आय वर्ग की महिलाएं) महिला सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस नेता के कार्यक्रमों में पहुंची। कांग्रेस ने भीड़ को देखकर ट्वीट किया, 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' संवाद कार्यक्रम में उमड़ी महिलाओं की ये भीड़ बता रही है- उत्तर प्रदेश की महिला शक्ति लड़ सकती है, अपने अधिकारों के लिए तानाशाही हुकूमत से भिड़ सकती है।'


प्रियंका गांधी ने चित्रकूट के प्रसिद्ध मतगजेंद्र शिव मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। प्रियंका गांधी के लिए एक नाव पर एक विशेष मंच बनाया गया था, लेकिन कांग्रेस नेता ने बातचीत के दौरान महिलाओं के साथ बैठना पसंद किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं के साथ संवाद के लिए चित्रकूट का चयन एक सावधानी से लिया गया कदम था, क्योंकि जिले का रामघाट क्षेत्र शायद भगवान राम के जीवन के करीब होने वाले एकमात्र अन्य स्थानों में से एक है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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